बस्ती। सल्टौवा क्षेत्र के बहरामपुर में आयोजित नव दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन की कथा में भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर कथा व्यास पंडित सूर्य प्रकाश चतुर्वेदी ने कहा कि जब पृथ्वी पापियों का बोझ सहन नहीं कर पा रही थी, तब सभी देवता ब्रह्मा जी व शिव के साथ क्षीर सागर में भगवान की स्तुति करने लगे। तब भगवान श्री हरि ने प्रसन्न होकर देवताओं को बताया कि मैं वासुदेव व देवकी के घर कृष्ण रूप में जन्म लूंगा और वृंदावन में मां यशोदा व नंदबाबा के घर बाल लीलाएं करूंगा। इसलिए आप सब भी उस समय धरती पर किसी ना किसी रूप में उपस्थित रहना।
उन्होंने बताया कि जब भगवान ने पृथ्वी पर श्रीकृष्णा अवतार धारण किया तब सभी देवता और स्वयं ब्रह्मा व शिव जी भी भगवान की लीलाओं के साक्षी बने थे। उन्होंने बताया कि इस तरह जब भी पृथ्वी पर कहीं भी भगवान का जन्मोमोत्सव मनाया जाता है, तो ये सब देवी-देवता भी वहां अवश्य आते है और भगवान के जन्मोत्सव का आनंद लेते है। कथा व्यास पंडित सूर्य प्रकाश चतुर्वेदी ने कहा कि जब भगवान ने कृष्ण जन्म लिया था, तब पृथ्वी पर ना जाने कितने जन्मों से जीव भगवान की प्रतीक्षा कर रहे थे। इसी तरह जब भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाता है और उस जन्मोत्सव में जो भाग लेते है, वे कोई साधारण जीव नहीं होते वे बहुत पुण्यात्मा होते है। पांचवें दिन की कथा में मुख्य यजमान डॉ0 विजय प्रभाकर त्रिपाठी, देव प्रभाकर त्रिपाठी,अरुण प्रभाकर,अरविंद प्रभाकर,सत्य प्रकाश त्रिपाठी,आलोक मणि,पिंटू,मिंटू,इंद्र देव मिश्रा,सुधीश चंद्र मिश्र,अर्चना, कविता, अनुपम, साधना,सरिता, मनीषा,रुद्र, अनय,अनिका, वेद श्री, विदुषी साहित सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।