अयोध्या में स्वामी सीताराम शरण की 27वीं पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या, उत्तर प्रदेश – अयोध्या के प्रसिद्ध लक्ष्मण किला में आज स्वामी सीताराम शरण की 27वीं पुण्यतिथि श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। इस विशेष अवसर पर अयोध्या के साधु-संतों, गृहस्थों और भाजपा के वरिष्ठ नेता बृजभूषण शरण सिंह ने स्वामी सीताराम शरण को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके जीवन के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
स्वामी सीताराम शरण की पुण्यतिथि पर, लक्ष्मण किला के अधिकारी सूर्य प्रकाश ने श्रद्धापूर्वक उनका स्मरण करते हुए कहा कि स्वामी जी एक उच्च कोटि के विद्वान संत थे, जिन्होंने अपना जीवन भगवान श्रीराम की भक्ति में समर्पित कर दिया था। अधिकारी ने कहा कि स्वामी सीताराम शरण हमेशा यह कामना करते थे कि उनका जीवन श्रीराम के चरणों में बीते और यदि भगवान चाहें तो उनके दोनों पैर टूट जाएं ताकि वे कहीं बाहर न जा सकें। उनका दृढ़ विश्वास था कि उनका अंतिम समय अयोध्या में, श्रीराम के धाम में ही आए और सरयू के जल में उनका अंतिम संस्कार हो।
स्वामी सीताराम शरण का यह जीवन दर्शन आज भी लाखों श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। वे अक्सर कथा, पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजनों के लिए बाहर जाते थे और यह चिंता करते थे कि कहीं बाहर उनके प्राण न निकल जाएं। इसलिए उन्होंने यह कामना की थी कि उनका अंत समय अयोध्या में, सरयू तट पर, भगवान श्रीराम के चरणों में हो। इस पुण्यतिथि के अवसर पर, लक्ष्मण किला में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए, जिनमें नाम कांति, धाम कांति और सप्त कांतियों का पारायण प्रमुख रूप से हुआ। महंत मैथिली रमण शरण के नेतृत्व में संतों ने स्वामी सीताराम शरण को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके भक्ति मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर एक विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
स्वामी युगलानन्य शरण द्वारा रचित कांतियों का पारायण भी इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। स्वामी सीताराम शरण के जीवन का मुख्य सिद्धांत रामकथा के शास्त्रीय प्रवक्ता के रूप में था और वे सामाजिक मुद्दों पर भी सक्रिय रूप से योगदान देते रहे थे। उनका योगदान आज भी अयोध्या और समस्त हिंदू समाज के लिए अमूल्य है।