अनुराग लक्ष्य, 20 जनवरी
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
अगर आप भारतीय फिल्मों के इतिहास पर गौर करेंगे तो आपको यह बात पता चलेगी कि भारतीय
सिनेमा की उन फिल्मों ने हमेशा कामयाबी हासिल की, जिन फिल्मों के गीत और संगीत ने सिने प्रेमियों को खूबसूरत गीतों का गुलदस्ता पेश किया।
उसी दौर की याद दिलाने के लिए निर्देशक संजय वत्सल ने अपने डायरेक्शन में गीतकार सलीम बस्तवी अज़ीज़ी के लिखे गीत , मुंबई शब की बाहों में जब भी आती है, दिन तो यूं ही कट जाता है रात नहीं कटती और महकी हुई ज़ुल्फ़ें हैं बहकी हुई सांसें हैं, जैसे गीतों का निर्देशित कर रहे हैं। जो भारतीय सिनेमा को कुछ यादगार गीत देने जा रहे हैं।
आपको बताते चलें कि संगीतकार राजेंद्र सलिल की कर्डप्रिय धुनों को सुन कर आप ज़रूर वाह वाह कर उठेंगे। जो कि एक लंबे अरसे से संगीत प्रेमियों को खूबसूरत गीतों का गुलदस्ता पेश कर चुके हैं।
यहां एक जरूरी बात यह है कि रास्कल म्यूज़िक कंपनी ने इस बात का ध्यान रखा है कि संगीत के नाम पर जो लोग सिर्फ पाश्चात्य धुनों का सहारा ले कर संगीत के नाम पर सिर्फ शोर मचा रहे हैं। उस शोर से संगीत प्रेमियों को खूबसूरत और भारतीय संगीत को आप तक पहुंचा सकें।