अयोध्या में श्रीराम कथा के तीसरे दिन भगवान शिव और माता सती के प्रसंगों पर विस्तृत चर्चा

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या । श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में चल रही श्रीराम कथा के तीसरे दिन कथा व्यास राधेश्याम शास्त्री जी ने ज्ञान, विज्ञान, धर्म और मोक्ष के गहन संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने भगवान शिव और माता सती के प्रसंगों को भी विस्तार से सुनाया। शास्त्री जी ने कहा कि विज्ञान और धर्म एक दूसरे के विरोधी नहीं हैं। विज्ञान हमें संसाधन देता है जबकि धर्म हमें संस्कार। उन्होंने कहा कि आज के समय में संसाधनों की भरमार है लेकिन संस्कारों का अभाव है। रामकथा हमें संस्कारों से जोड़ती है। शास्त्री जी ने भक्तों को धर्म ग्रंथों और महापुरुषों के बताए हुए मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भय हमें धर्म से दूर ले जाता है। निर्भीत होकर ही हम सत्य और धर्म की रक्षा कर सकते हैं। श्रीराम जन्मभूमि परिसर में मंदिर निर्माण की प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शास्त्री जी ने कहा कि भक्तों को मिल रही सुविधाओं से भगवान राम प्रसन्न हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मात्र एक ही है और यह हमेशा भव्य बनी रहेगी। कथा में संत तुलसीदास जी पर भी प्रकाश डाला गया। शास्त्री जी ने कहा कि संत तुलसीदास जी नारी सम्मान के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने श्रीरामचरित मानस में भगवान शिव और माता सती की कथा को विस्तार से वर्णित किया है। शास्त्री जी ने युवाओं और बच्चों को संस्कारवान बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को रामकथा सुनानी चाहिए ताकि वे संस्कारवान बन सकें। कथा पंडाल में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चम्पत राय, मुथुड फाइनेंस कम्पनी के चेयरमैन एलेक्जेंडर आदि कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।