54 कुंडीय यज्ञ, 121 कलश शोभायात्रा: अयोध्या में भव्य आयोजन

 

श्रीधराचार्य जी के सानिध्य में अयोध्या में धार्मिक अनुष्ठान

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। मानव जाति के प्रथम पूर्वज महाराज मनु की धरती देवभूमि अयोध्या में शोभायात्रा के साथ प्रारंभ हुआ पंचनारायण महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ विश्व प्रसिद्ध अशर्फी भवन पीठ में श्रीमद् जगतगुरु रामानुजाचार्य श्री स्वामी श्रीधराचार्य जी महाराज के सानिध्य में श्रीमद् भागवत कथा आयोजन समिति के द्वारा 54 कुंडिया पंचनारायण महायज्ञ के प्रथम दिवस पर यज्ञ मंडप का वास्तु पूजन अंकुर रोपण चक्राव्ज मंडल दिगपाल स्थापना दक्षिण भारत आचार्यों के द्वारा किया गया तथा भगवान लक्ष्मी नारायण प्रभु का ताम्र एवं रजत कलश में पंचामृत विविध प्रकार की औषधि फलों के रस से अभिषेक किया गया 121 कलश के शोभा यात्रा निकाली गई 108 ब्राह्मण बैठ करके श्रीमद् भागवत महापुराण का पाठ कर रहे हैं व्यास पीठ पर विराजित स्वामी श्रीधराचार्य जी महाराज ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा यज्ञ ही सबसे श्रेष्ठ कर्म है इस समय अशर्फी भगवान पीठ में आए हुए श्रद्धालुओं को तीन प्रकार के यज्ञ का लाभ प्राप्त हो रहा है एक यज्ञ कुंड में आहुति प्रदान करके भगवान श्रीमन नारायण को प्रसन्न किया जा रहा है दूसरा श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से ज्ञान यज्ञ के द्वारा आत्मा को भोजन प्रदान किया जा रहा है तीसरा अन्न यज्ञ के द्वारा सभी कर्मों के साधन शरीर को तृप्त किया जा रहा है जन्म-जन्मांतरों का जब पुण्य उदय होता है तब मनुष्य के भाग्य उदय होने पर उसे तीर्थ सेवन का अवसर प्राप्त होता है तीर्थ क्षेत्र में रहकर आत्म संयम पूर्वक परमात्मा का पूजन भजन यजन करना चाहिए परमात्मा के द्वारा प्रदान किया गया मानव शरीर ईश्वर की कृति की सर्वश्रेष्ठ संपत्ति है इस संपत्ति का सदुपयोग सर्वेश्वर श्रीमन नारायण की आराधना में करना चाहिए जिस मनुष्य ने मानव शरीर प्राप्त करके सद्गुरु की शरण में जाकर आत्मोद्धार के लिए पूजन यजन भजन नहीं किया आत्महत्यारा होता है इसलिए मानव जीवन प्राप्त करके सदा श्रीमद् भागवत कथा का सेवन करना चाहिए भगवान का यजन करना चाहिए प्राणी मात्र की सेवा करना चाहिए।