
अनुराग लक्ष्य, 17 दिसंबर
मुम्बई संवाददाता ।
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी ,
इस दुनिया में अभी भी कुछ खूबसूरत इंसान इस सरजमीन पर अपने पूरे वजूद के साथ मुहब्बतों को आम करने में लगे हैं। और इस बात का मुझे तब एहसास हुआ, जब मैं ललाट म्यूज़िकल आर्ट्स के रूह ए रवाँ उमाकांत वर्मा और साथ ही बेहद संजीदा मेज़ाज़ की शख्सियत श्री राम शर्मा जी से मिला। जिन्होंने मेरी पत्रिका ,,अनुराग लक्ष्य,, अपने प्यार और स्नेह के साथ मेरे गीतों और ग़ज़लों को भरपूर सम्मान दिया।
साथ ही मुंबई की सरजमीं पर एक खूबसूरत गीतकार की शक्ल में भाई राम जी कन्नौजिया के सानिध्य के साथ कुछ पल गीतों और ग़ज़लों के साथ गुजारने का मौका मिला। जो एक दिलकश और खुशनुमा शाम में तब्दील हो गई।
इस अवसर पर श्री राम शर्मा जी ने अपने कलाम से भी नवाज़ा, जिसकी भूरि भूरि प्रशंसा हुई,
,,,, झूठ नफ़रत हिंसा पाखंड से ज़िंदगी नरक मत बनाईए,
सत्य अहिंसा मानवता प्रेम से ज़िंदगी को स्वर्ग बनाईए।
न जाने कब कहां किस हाल में जिंदगी की शाम हो जाए,
दिलों से नफरतों को मिटा कर प्रेम से ज़िंदगी को सफल बनाईए।। ,,,
इसी तरह गीतकार राम जी कन्नौजिया ने भी अपने बेहतरीन कलाम से समायीन को बाग बाग कर दिया, उनका कलाम,
,,,, वोह मुझे आज इस तरह क्यों छोड़ कर गया
जो दिल से चाहता था, दिल क्यों तोड़ कर गया
पलकें थीं इंतेज़ार में वो आया न लौट कर,
कहें राम जी जो इस कदर मुंह मोड़कर गया,,,
और अंत में शायर सलीम बस्तवी अज़ीज़ी ने अपनी कई ग़ज़लों और गीतों को सुनकर सामयीन के दिलों में उतर गए, उनका कलाम,
,,, माना शहंशाहों के जैसा मेरे तन पे है यह लेबास,
पर, यह जो है आपने पहना अच्छा लगता है,
मेरी नज़र में हिन्दू मुस्लिम, मन्दिर मस्जिद एक समान,
गंग ओ जमन सा इनका बहना अच्छा लगता है,,,
इस खुशनुमा शाम को यादगार बनाने में ललाट म्यूज़िकल आर्ट्स के रूह ए रवाँ उमाकांत वर्मा जी का योगदान बहुत ही सराहनीय रहा।