स्वतंत्र लेखन मंच पर बाल दिवस खूब धूमधाम से मनाया गया। बालमन विषय को केंद्र में रखकर न केवल रचनाकारों, अपितु बच्चों की वीडियो प्रस्तुति को खूब सराहा गया। स्वतंत्र लेखन मंच की अध्यक्षा दवीना अमर ठकराल ‘देविका’ के मार्गदर्शन और विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’ के नेतृत्व में यह अनोखी प्रतियोगिता, जहां बाल मन के भावों की अभिव्यक्ति थी, वहीं बच्चों द्वारा स्वरबद्ध करी गयी रचनाएँ मधुर और कर्णप्रिय थी। बाल मन अर्थात एक बालक के समान कोमल मन जो प्रत्येक व्यक्ति में छुपा होता है। बालक अपने मन में असीमित कल्पनाएं लिए उन्हीं में विचरण करता रहता है और इसीलिए बचपन अर्थात बाल्यावस्था को हमारे जीवन की सबसे आनंददायक अवस्था मानी गई है। स्नेह ममत्व आशीर्वाद से अभिसिंचित होता सदा सबके मन को भाता है बचपन। कुछ ऐसा ही होता है बालमन।
कुल 51 रचनाओं में एक ओर बाल दिवस की महत्ता पर सृजन हुआ वहीं दूसरी ओर बच्चों की चंचलता, चपलता, सहजता ने मन मोह लिया। मंच का संचालन कुमारी अमिता गुप्ता नव्या ‘सुरभि’ ने अत्यंत कुशलता पूर्वक किया। आज बालमन की अबाधित उड़ान देखने के लिए रचनाओं की बंदिश नहीं थी| सबसे युवा 2वर्ष आठ माह की नायरा चमोली, अंशिका गुप्ता, अनिष्का गुप्ता, पावनी टंडन, परी पाण्डेय, समृद्धि सिंह, वैष्णवी पाण्डेय, अंजलि वर्मा, वंशिका, आयुष भारती, माधव अग्रवाल, हर्षिता गुप्ता, नव्या चौहान,निशीत अरोरा, गव्य वर्मा, युवराज वर्मा, हनी, आराध्या, कुसुम, रिद्धी नेगी, कनक गुप्ता, प्राशी श्रीवास्तव, संस्कृति पाण्डेय, केनिशा लाहिड़ी, रियांश गौड़, जागृति बुटोला, अंशु जांगिड़, नव्या जोशी, मिष्टि सिंह, किट्टु सिंह, आराध्या गर्ग, पवित्रा कश्यप, स्तुति गुप्ता, ईशा सक्सेना, आद्विक गुप्ता, वंश गुप्ता, पार्थ पिपलिया, रिद्धी नेगी, उत्कर्ष बुटोला, मानव अग्रवाल, आकांक्षा और मोनिका ने रचनाकारों की स्वरचित कविताओं के साथ, कल्पना की उड़ान, स्वाभाविकता और स्वच्छंदता के साथ बालमन के सपने और प्रचलित गीत कविता जैसे मछली जल की रानी है, आरंभ है प्रचंड, तांडव स्रोतम, राम भजन, हनुमान चालीसा, माँ शारदे की स्तुति, तुलसीदास रचित रुद्राष्टकम् आदि को स्वर और भाव दिये|
एकता गुप्ता ‘महक’, स्वर्णलता सोन ‘कोकिला’, अनु तोमर ‘अग्रजा’, वीना टंडन, आशा बुटोला ‘सुप्रसन्ना’, रेखा पुरोहित ‘तरंगिणी’, दिव्या भट्ट ‘स्वयं’, नीरजा शर्मा ‘अवनि’, अरुण ठाकर ‘जिंदगी’, संजीव कुमार भटनागर ‘सजग’, सुरेश चंद्र जोशी ‘सहयोगी’, अशोक दोशी ‘दिवाकर’, संगीता चमोली ‘इन्दुजा’, पूनम सिंह, किरण भाटिया, नन्दा बमराडा ‘सलिला’, नीतू गर्ग ‘कमलिनी’, डॉ अनीता राजपाल अनु ‘वसुंधरा’, अनु भाटिया आदि समर्पित रचनाकारों ने अपनी रचना और अनूठे परिवेश से स्कूल के दिनों की याद दिलाई|
प्रतियोगिता और प्रतिभागिता के लिए नीरजा शर्मा ‘अवनि’, सुमित जोशी ‘राइटर, जोश’, सुनील भारती और नीतू गर्ग ‘कमलिनी’ ने रचनात्मक पोस्टर, कोलाज और वीडियो बनाए, साथ ही अनुपम प्रशस्ति पत्रों के नवल रूप से रचनाकारों को सम्मान प्रदान किया, जो कार्यक्रम की गरिमा के अनुरूप थे। कृष्णकांत मिश्रा ‘कमल’ के सहयोग और डॉ दवीना अमर ठकराल ‘देविका’ के उद्बोधन ने रचनाकारों के लिए प्रेरणा और प्रोत्साहन का कार्य किया। कार्यक्रम की समीक्षा अशोक दोशी ‘दिवाकर’ और सुरेश जोशी ‘सहयोगी’ ने अपने अनूठे अंदाज में की। डॉ दवीना अमर ठकराल देविका के अनुसार बालमन गुनगुनाता मन, मनमोहना, खिलौनो की दुनिया में रमकर प्रत्यक्ष को सच मानता दुनिया के भय डर से परे होता है। मन में एक खिलखिलाहट और स्वतंत्र भावों का संचार करे जो न तो किन्हीं उपदेशात्मक या नैतिक बंधनों में बांधती हो, और न ही उबाऊ हो, ऐसे भाव रहने से बच्चों के साथ साथ व्यस्कों का मन भी उमंग, कल्पना और मुस्कुराहट से भरा रहेगा|
डॉ दवीना अमर ठकराल देविका ने लाइव आकर विस्तृत समीक्षात्मक अभिव्यक्ति दी और सभी बच्चों को अत्यंत हर्षोलास से अति सुंदर बालकवि व बाल योगी सम्मान से से सम्मानित किया गया।