🌻 ओ३म् 🌻*हिदुओं की मां आर्य समाज*
आर्य समाज क्या है? इस विषय पर *आर्य समाज मंदिर आवास विकास वैदिक उपासना स्थल मकान संख्या -४२७ में* एक व्याख्यान माला सम्पन्न हुई!
आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द सरस्वती थे।
🪷 *१९वीं शताब्दी एतिहासिक*🪷
१९ वीं शताब्दी में भारतीय संस्कृति में रुढ़िवाद,गुरुडमवाद,व कुरीतियों ने प्रवेश कर दिया। अनेक मत-मतान्तरों ने मानवों को बांट दिया था। शैव,शाक्त,वैष्णवों के भी पचासों अवान्तर भेद हो गये थे। *सभी अपने को सच्चा दूसरे को झूठा* कहते थे।ईसाई,अंग्रेज,जर्मन के अध्यापकों द्वारा *लार्ड मैकाले* की शिक्षा का प्रचार व भारतीय शिक्षा का उपहास कर युवा शक्ति को गुमराह किया जा रहा था।वेद ,गायत्री,यज्ञोपवीतकेवल *जातिवादी ब्राह्मणों* के ऊदर की पूर्ति का माध्यम बनाया जा रहा था।इसका भयंकर परिणाम यह हुआ कि हमारे दलित,शोषित,अछूत भाई *ईसाई,मुसलमान,बौद्ध वाम मार्गी* बनकर वैदिक वट वृक्ष की जड़ों को खोखला कर रहे थे!
इतिहास की दृष्टि से यह समय सन् १८७४ का था।इसी समय दंडी स्वामी प्रज्ञा चक्षु गुरु विरजानन्द सरस्वती के शिष्य वैदिक धर्म का प्रचार प्रसार करने के लिए मुंम्ब ई पधारे! इस समय हिंदू लोग बल्लभाचार्य द्वारा स्थापित *पुष्टिमार्ग* के अनुनाई थे। महर्षि दयानन्द से प्रभावित होकर इनके शिष्य अपने गुरू *पं० गुट्टू लाल* से कहते थे महर्षि दयानंद कहते हैं कि वेद ईश्वरीय वाणी है और वेदों में मूर्ति पूजा नहीं है आप बतायें कि सही क्या है?तब उनके गुरु ने शास्त्रार्थ की बात कही।महर्षि दयानंद जी ने शास्त्रार्थ की बात स्वीकार कर ली।तारीख तय हो ग ई।पोस्टर छप गये मगर शास्त्रार्थ के दिन पं० गुट्टु लाल सभा भी नहीं आये परिणाम उसके आधे शिष्य महर्षि दयानंद के शिष्य बन गये।
इसके बाद महर्षि दयानंद के शिष्यों ने मुंम्ब ई शहर में पर्चे बांटे कि अगर मूर्ति पूजा वेदों में सिद्ध कर दे तो उनको ५०००रुपये इनाम मिलेगा। सन् १८७४-७५ में यह राशि बहुत बड़ी थी।मगर किसी ने भी ये चुनौती स्वीकार नहीं की।तब स्वामी जी के पक्ष में कुल १०० लोग थे।इन्ही *१०० लोगों को लेकर महर्षि दयानंद जी ने *आर्य समाज का पुण्य बीज* बोया था।
जिस दिन यह बीज बोया वह *चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा बुधवार संवत १९३१ तदनुसार ७अप्रैल सन् १८७५ मध्यांतर ४ बजे* का समय था!
धीरे -धीरे इस संगठन के लिए लोगों ने दान देना शुरु किया। प्रथम दान देने वाले दान दाता मुसलमान थे नाम था *सेठ हाजी अल्लारखिया रहमतुल्ला सोना वाला* दान राशि थी ५००० रुपया जो चैक द्वारा प्रथम प्रधान *वकील गिरधर लाल दास कोठारी* को दिया गया।
यहां से आर्य समाज एक क्रांतिकारी संगठन के रुप में प्रसिद्ध हुआ।
मुख्य क्रांति में * विचार क्रांति,सामाजिक क्रांति,सुराज क्रांति,आर्थिक क्रांति,राजनीतिक क्रांति हैं जिसके बल पर *आर्य समाज विश्व का सबसे बड़ा* क्रांतिकारी संगठन बना।इसी के चलते अंग्रेजों को *भारत* छोड़ना पड़ा।
*अंतर्राष्ट्रीय अभिवादन*
आर्य समाज ने *समाज* को राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए *नमस्ते* का अभिवादन दिया आगे चलकर जो *अंतराष्ट्रीय* अभिवादन बन गया!
*हिंदुओं की मा आर्य समाज*
आज जो सुधरा हुआ हिंदू समाज है वो आर्य समाज की देन है।आर्य समाज से पहले हिंदू समाज को * *DOCILE AND SUBMISSVE HINDU अर्थात् गाय जैंसा गरीब व शरणार्थी हिंदू कहा जाता था। दि पीपुल्स आफ इंडिया के लेखक *सरजान सीलि* ने लिखा है। जो हिंदू धर्म अपनी दार्शनिक अनिश्चितता की ठंडी राख के कारण अपनी राष्ट्रीय एकता बनाने में असमर्थ था,उसे महर्षि दयानंद सरस्वती ने *साहसी व पुरुषार्थी* बना दिया था। दिनांक एक(१) अप्रैल १८७९ में उन्होंने आर्य समाज दानापुर (विहार) को पत्र लिखा *इस देश से विद्या और सुख भूगोल में फैला हैअत: अब आप हिंदू की जगह आर्य समाज लिखें।आर्य हमारा नाम और आर्यावर्त्त हमारे देश का नाम* है।
🏵️ *स्वराज क्रांति*🏵️
गुलाम भारत में हिंदी के प्रथम अमर ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश के अष्टम समुल्लास में महर्षि दयानंद जी ने लिखा।
*जब दुर्दिन आता है तब देशवासियों को अनेक प्रकार का दुख भोगना पड़ता है।कोई कितना भी करे परंतु जो स्वदेशी राज्य होता है वह सर्वोपरि होता है।*
इस प्रकार की गुलाम भारत में राष्ट्र भक्ति भावनाओं को फैलाते देखकर अंग्रेज सरकार भयभीत हो ग ई।इस लिए अंग्रेजों ने आर्य समाज व सत्यार्थ प्रकाश के विरुद्ध अनेक मुकदमें चलाये! जिसका संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है।
*[१]* सन् १९०२ में इलाहाबाद ,१९०५ में करांची में,१९०९ में पटियाला में मुकदमें चले।आर्य समाजियों को *OUT LOW* करार दिया। गुरुकुलों को अपना प्रबल शत्रु माना। *७ लाख ८२ हजार गुरुकुल* थे उनको नष्ट कर दिया।
*[२]* सन् १९०० से १९१२ तक अंग्रेजों ने आर्य समाजियों के लिए नौकरी पर रोक लगा दी। डिस्कवरी आफ इंडिया के पृष्ठ ३९९ में जवाहर लाल नेहरु को यह लिखने के लिए मजबूर होना पड़ा! कि *आर्य समाज ने लड़के -लड़कियों की शिक्षा,स्त्रियों की दशा सुधारने और दलितों का सामाजिक स्तर उठाने में बहुत उत्तम कार्य किया है।*
🌼 *विश्वव्यापी संगठन*🌼
महात्मा बुद्ध ने केवल सदाचार व अति अंहिसा वाद को अपनाया। ईश्वर की उपेक्षा की! आचार्य शंकर ने ईश्वर को अपनाया संसार की उपेक्षा की।परिणाम स्वरुप दोनों संगठन असफल रहे।महर्षि दयानंद जी ने *त्याग व भोग* का संतुलन बनाकर *परमात्मा -आत्मा -संसार* तीनों का अपनाया।परिणाम स्वरूप आज सारे विश्व मे आर्य व आर्य समाजी फैले हैं और आर्य समाज एक विश्व व्यापी संगठन है। हिंदुओं के ऊपर जब भी *धार्मिक,सामाजिक,चारित्रक,एतिहासिक संकट आता है तब -तब आर्य समाज वैदिक प्रमाणों द्वारा हिंदुओं का पालन व रक्षण आज भी करता है।इसीलिए आर्य समाज को हिंदुओं की मां* कहा जाता है।जो एक निर्विवाद एवं अकाट्य सत्य है।
आचार्य सुरेश वैदिक प्रवक्ता।
*प्रवासीय कार्यालय*
वैदिक उपासना स्थल
४२७ आवास विकास कालोनी बस्ती।उ०प्र०