
अनुराग लक्ष्य, 17 सितंबर
मुम्बई संवाददाता ।
बारह रबीउल अव्वल के मौके पर धारावी के मदीना मस्जिद में एक अजीमुश्शान नातिया मुशायरे का आयोजन किया गया, जिसकी सदारत हज़रत मौलाना जुनैद आलम अशरफी ने की, और नेज़ामत के फरायेज़ को बहुत खूबसूरत अंदाज़ में अंजाम दिया शायर ए इस्लाम सलीम बस्तवी अज़ीज़ी ने ।
उठो ऐ मोमिनों आका मेरे तशरीफ लाए हैं
हज़ारों नेमतें दामन में लेकर अपने आए हैं
टूट जायेंगी ज़ंजीरें ज़माने में अब ज़ुल्मत की
इमामुल अंबिया बनकर मेरे मुख्तार आए हैं,
उपरोक पंक्तियों के साथ प्रोग्राम के संचालक सलीम बस्तवी अज़ीज़ी ने जलसे का आगाज़ किया, तदुप्रांत हाफिज ओ कारी शाहनवाज़ रज़वी ने तिवालत ए कुरआन पाक से जलसे का बाज़ाबता आगाज़ किया।
मुशायरे का आगाज़ हाफिज इकरामुल हक के कलाम,
,,बेखुद किए देते अंदाज़ हिजा बाना,
आ दिल में तुझे रखलूं ऐ जलव ए जाना ना,,
से हुआ, जिसे समायीं हजरात ने बेहद सराहा।
इसी फेहरिस्त में जाफर शेख के तरन्नुम भरे अंदाज़ को लोगों ने खूब सराहा, उनका कलाम,
,, आ गए सरकार मेरे, नेमतें बंटने लगीं,
आओ तुम भी भर लो दामन सैयदे अबरार से,,
सुनाकर महफिल को खुशनुमा कर दिया।
इसी फेहरिस्त में कारी शानवाज़ रजवी और साजिद रज़ा सहित शाकिर सुल्तानपुरी ने भी अपने अपने मैयरी कलाम से खूब दाद ओ तहसीन हासिल की।
मुशायरे की नेज़ामत कर रहे शायर सलीम बस्तवी अज़ीज़ी ने दर्जनों नातिया कलाम सुनाकर श्रोताओं और समायीन हजरात को झूमने पर मजबूर कर दिया, उनका कलाम,
,, मदीने की हसीं गलियों से यह पैगाम आया है,
मोहम्मद के गुलामों में भी तेरा नाम आया है
न दौलत काम आई और न दुनिया ही काम ही आई
जो पढ़ते थे दुरूद उन पर वही अब काम आया है,,,
और, आखिर में सदारत कर रहे मौलाना जुनैद साहब अशर्फी ने भी अपने खूबसूरत कलाम से समायीन को बाग बाग कर दिया। उनका कलाम,
नसीब चमके हैं फर्शियों के, अर्श के चांद आ रहे हैं,
झलक से जिनकी फलक है रोशन वोह शम्श तशरीफ ला रहे हैं,,,
मुशायरे का समापन सलीम बस्तवी अज़ीज़ी के सलात ओ सलाम के साथ हुआ।
मुशायरे में काफी तादाद में लोगों ने शिरकत करके मुशायरे को कामयाब बनाने में अपना योगदान दिया, जिसमें मुख्य रूप से सेराज खान, दिलकश शेख, मोहम्मद रेयाज, मुहम्मद ज़ेबैर, हुसैन भाई,अहमद एजाज़, शब्बीर भाई , गुलशन डेरी सहित तमाम लोगों का योगदान सराहनीय रहा।