आजादी के दीवानों की वीर गाथा का मंचन

प्रयागराज। “समर्पित” साहित्यिक सांस्कृतिक एवम सामाजिक संस्था की तरफ से  नाटक “अमर शहीद सोहन लाल पाठक” का मंचन सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल में किया गया। इसमें संगीत नाटक अकादेमी नई दिल्ली ने सहयोग किया। लेखन अंजू गुलाटी ने किया।
नाटक में प्रस्तुत किया गया कि आजादी की लड़ाई में कई स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। इन्हीं स्वतंत्रता सेनानियों में एक वीर सपूत सोहन लाल पाठक भी थे, जिन्होंने अंग्रेजों से आखिरी सांस तक लड़ाई लड़ी लेकिन अंग्रेजों के सामने कभी नहीं झुके। अमृतसर में जन्मे सोहन लाल पाठक एक साधारण शिक्षक थे कुछ समय बाद नौकरी से इस्तीफा दे दिया और देश प्रेम में भारतीय को जागरूक करने के लिए उन्होंने अंग्रेजो की गुलामी कर रहे भारतीयो को बताया कि अंग्रेजों के लिए अपनी जान मत दो, बल्कि जान देनी है तो अपनी मातृभूमि के लिए अपनी जान  दो। क्या आप लोगो को अपनी भारत माता की पुकार नहीं सुनाई देती? यह सुनकर  कई लोगों ने अंग्रेजो की गुलामी छोड़ दी तथा अंग्रेजों के खिलाफ ही आज़ादी की जंग में कूद गए। एक दिन जब सोहन लाल पाठक जनता को संबोधित कर लौट रहे थे, तो एक व्यक्ति ने उन्हें धोखे से  गिरफ्तार करवा दिया। उन्हें वहीं से मांडले जेल भेज दिया गया तथा जब उन्होंने माफी नहीं मांगी, तो उन्हें फांसी दे दिया गया।
अभिनय करने वाले कलाकारों में रूपेश कुमार, गोपाल कुशवाहा, सत्यम मिश्रा, जगदीश गौड़, ऋषभ उपाध्याय आदि शामिल थे। संजू साहू की निर्देशकीय कौशल ने दर्शकों को भावुक कर दिया। प्रकाश संचालन अनुज श्रीवास्तव ने की। संगीत संयोजन राजेश कुमार,प्रस्तुति प्रभारी संतोष पाल रहे।