कोलकाता और मुंबई रेप कांड पर विशेष, किताबें कह रहीं क़ानून औरत का मुहफ़िज़ है, हमारे देश में रावण अभी सीता को छलते हैं, सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,,,,,

अनुराग लक्ष्य, 22 अगस्त
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता।
किताबें कह रहीं क़ानून औरत का मुहफ़िज़ है, हमारे देश में रावण अभी सीता को छलते हैं, जी हां, यह सुनकर आपको कुछ अजीब तो ज़रूर लगा होगा। लेकिन कोलकाता और मुंबई के इलावा भी देश भर में जहां जहां इस वक्त इन शैतानी प्रवृतियों ने अपने हवस का शिकार जिन बहनों बेटियों को बनाया है। वोह चीख चीख कर यही कह रही हैं। कि, किताबें कह रहीं क़ानून औरत का मुहफ़िज़ है हमारे देश में रावण अभी सीता को छलते हैं।
कितने शर्म की बात है के जिस देश में चार साल की आयु की बच्चियों की आबरू अब महफूज़ नहीं है, उस देश में , बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, का नारा कैसे सार्थक हो सकता है।
अब प्रश्न यह उठता है कि ऐसे कुकर्म करने वालों को समाज क्या सज़ा दे, और दे भी क्या सकता है। क्योंकि यह तो बरसों से हो रहा है। इन शैतानी हौसलों को आखिर कौन लगाम लगाएगा। हमारी सरकार या हम खुद, या हमारी वोह संस्थाएं जो महिला उत्पीड़न के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करती रहती हैं। समय कह रहा है कि आपको इसके लिए खुद आगे आना होगा। जिससे इन शैतानी प्रवृतियों को लगाम लगाया जा सके।
वैसे तो इस देश में बड़े बड़े बलात्कारियों की एक लंबी लिस्ट है, जो अभी जेल की सलाखों के अंदर सज़ा काट रहे हैं। लेकिन इसके बाद भी यह सिलसिला बदस्तूर जारी है और बलात्कारी आए दिन किसी न किसी बेटी या बहन को अपनी हवस का शिकार बना रहे हैं। उनके इस कुकर्तिये को रोकने के लिए मैं तो सिर्फ इतना ही कह सकता हूं कि,
तुम अपनी पश्चिमी तहज़ीब की नंगी नुमाइश में, मेरी सीता और मरियम की है जो पहचान मत छीनो।