लखनऊ बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में दिनांक 20 अगस्त को राजनीति विज्ञान विभाग के ओर से ’21वीं सदी में अंतर्राष्ट्रीय उदारवादी व्यवस्था के प्रति भारत की प्रतिक्रिया’ विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, संगठन और निरस्त्रीकरण केंद्र के प्रो. शांतेश कुमार सिंह उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त मंच पर राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सार्तिक बाघ, कार्यक्रम समन्वयक प्रो. रिपु सूदन सिंह, प्रो. विनोद खोबरागड़े एवं डॉ. सिद्धार्थ मुखर्जी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत आयोजन समिति की ओर से मुख्य अतिथि एवं शिक्षकों को पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट करने के साथ हुई। सर्वप्रथम प्रो. सार्तिक बाघ ने सभी को मुख्य अतिथि के परिचय से अवगत कराया। इसके पश्चात कार्यक्रम समन्वयक प्रो. रिपु सूदन सिंह ने कार्यक्रम के उद्देश्य एवं रुपरेखा की जानकारी दी। मंच संचालन का कार्य सुश्री मंजरी राज द्वारा किया गया।
मुख्य अतिथि प्रो. शांतेश कुमार सिंह ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि उदारवाद की शुरुआत एक विचारधारा के रूप में हुई। आज जब वैश्विक मामलों में पश्चिमी देश अपने कदम पीछे ले रहा है वहीं भारत अपनी उदारवादी कूटनीति के कारण एक प्रमुख संगठन के रूप में उभर रहा है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र की मज़बूती , सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने एवं जलवायु परिवर्तन आदि समस्याओं से निपटने में भारत के प्रयासों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है, जो स्वयं में भारत देश की नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है। कार्यक्रम समन्वयक प्रो. रिपु सूदन सिंह ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भारत देश तेजी से आधुनिकीकरण की राह पर अग्रसर है। भारत को दुनिया में नैतिकता और अच्छाई के हक की लड़ाई करने वाला देश माना जाता है। भारत की यही विशेषता वैश्विक स्तर पर इसे अन्य देशों से अलग बनाती है। इसके अतिरिक्त प्रो. सार्तिक बाघ ने भी भारत के उदारवादी दृष्टिकोण से संबंधित पहलुओं पर अपने विचार रखे। अंत में धन्यवाद ज्ञापन का कार्य डॉ. सिद्धार्थ मुखर्जी द्वारा किया गया। समस्त कार्यक्रम के दौरान डॉ . प्रदीप कुमार सिंह, डॉ. ओ. पी. बी. शुक्ला, डॉ. प्रीति चौधरी , डॉ. रमेश नैलवाल, विभिन्न विभागों के शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहें।