आइए जाने नागों का पर्व नागपंचमी की वास्तविकता

🌹ओ३म् 🌹
🌼 *नागों का पर्व नागपंचमी 🌼*
मानव का सबसे बड़ा शत्रु है *अविद्या, अज्ञान,न जानना, मिथ्या ज्ञान* महाभारत काल के युद्ध में वैदिक विद्वानों के मारे जाने से 🌳सत्य ज्ञान 🌳 विलुप्त हो गया और 🔥 मुंडे-मुडे मतिर्भिन्ना🔥 का वामपंथ भारत में आया। उसने हमारी संस्कृति, सभ्यता पर जो प्रहार किया उससे अभी भी हम नहीं उभर पाये।ऐसी ही एक भ्रांति है 🌳 *नागपंचमी 🌳* के पर्व पर।आज के दिन लोग काल्पनिक नागों को दूध पिलाते हैं और पर्व के महान अर्थ को भूल गए हैं।
🏵️ *कौन हैं नाग?🏵️*
महाभारत के बाद आर्य लोग क ई उप नामों में बंट गए। जैंसे देव, मनुष्य,राक्षस, किन्नर,यक्ष,कोल,भील किरात,नाग, वासुकी। इन्हीं उप जातियों में एक जाति थी और आज भी है जिसे🏵️ नाग जाति 🏵️ कहते हैं।ये लोग नदियों के किनारे रहते थे।अपार बलशाली होते थे।दूध इनके पौष्टिक आहारों में एक था। इनको आयुर्वेद का भी बहुत ज्ञान था। आयुर्वेद के अनुसार श्रावण(सावन) में प्रकृति गर्भवती होती है उस समय उसमें रोगों का संक्रमण होता है वह संक्रमण घास खाने के वजह से गौ के दूध में भी होता है। इसलिए श्रावण(सावन) में दूध का सेवन वर्जित है इसलिए नाग जाति इस समय दूध से अनेक पौष्टिक पदार्थों को बनाते थे व अनेकों प्रकार के 🏵️ *शक्ति प्रदर्शन 🏵️ की प्रतियोगिताओं का आयोजन करते थे। जैंसे मल्ल विद्या आदि। ये नाग जाति रामायण काल से महाभारत काल तक बहुत प्रसिद्ध रही। लंकापति रावण ने एक बार नाग जाति से युद्ध किया।उसके युद्ध कौशल से प्रभावित होकर नाग वंशियों ने अपनी बेटी♦️ * *मंदोदरी* ♦️ का विवाह रावण से किया। राम-रावण युद्ध में क ई नागवंशी रावण की सेना में श्रीराम से युद्ध किये और पराजित हुए।
महाराज परिक्षित को नागवंशियों के राष्ट्रपति 🦋 तक्षक नाग के महाबली🦋ने युद्ध में परास्त किया था।
भगवान कृष्ण का🌼 महाप्रतापी नागराज कालिया🌼 से क ई दिन तक महासंग्राम हुआ। क्योंकि *श्रीकृष्ण ब्रह्मचारी व योगी थे अंत में उन्होंने बलवान कालिया नागनरेश को मार दिया* बांकी सेना भाग ग ई। इनमें एक दोष था जहां ये बलवान थे वहीं उचित अनुचित का भेद नहीं कर पाते थे जैसे कि आज के❤️ मांसाहारी पहलवान ❤️ ।ऐंसी महान मानवों की एक बीर प्रजाति पर बाम मार्गियों ने काल्पनिक इतिहास लिखकर भारतीय अभेद्य सैन्य शक्ति को♦️ काल्पनिक नाम ♦️ बनाकर प्रचारित कर दिया और 🌳 सत्य वचन 🌳 महाराज कह कर हिंदुओं ने मान लिया। काल्पनिक सर्प का चित्र बना पूजना शुरू कर दिया।
🏵️ *दो खोजें देखें 🏵️*
🌳🌳[१]🌳🌳
आचार्य चाणक्य को पढ़िए।वो लिखते हैं सर्प को दूध पिलाने से उसका बिष बढ़ता है।आप इतना कीमती दूध सर्प को पिलाकर दूध का अपमान कर रहे हैं ये कहां की बुद्धिमानी है? फिर आचार्य चाणक्य लिखते हैं यदि सांप घर मे आ जाये तो उसको भगाओ यदि भागता नहीं तो मार डालो और ज्यादा दया आती है तो घर में 🔥 कफन 🔥 लाकर रख दो। *क्योंकि जिस प्राणी का जो प्रकृति प्रदत्त स्वभाव है वो कभी बदलता नहीं है*।सर्प का स्वभाव है डंक मारना। यहां यह भी ध्यान दें कि आचार्य चाणक्य यह‌ नहीं कह रहे हैं कि जंगल मे या रास्ते में सांप को खोजकर मारो। यद्यपि परमात्मा की सृष्टि है सर्प, बिच्छू आदि कीट बहुत सारा कार्बन डाई खाकर पर्यावरण की रक्षा भी करते हैं फिर भी सर्प का भोजन मेंढक आदि जंतुओं को निगलना है।वह प्रकृति से मांसाहारी हैं और मांस को भी वह खाता नहीं निगलता है।
🌳🌳[२]🌳🌳🌳
यदि कभी आप मुंबई जायें तो वहां पर सर्पों का बहुत बड़ा म्यूजियम है। उसमें दीवार पर बहुत मोटे अक्षरों में लिखा है। * *सर्पों में नाग नाम की प्रजाति* नहीं होती। और ऐसा लिखने वाले कोई साधारण लोग नहीं अपितु जन्तु वैज्ञानिक है। इसलिए आशय यही है कि हमें भ्रांति मिटानी चाहिए और आर्यों की पतित शाखा महाबली बीर 🌳 *नागवंश 🌳 का सम्मान करना चाहिए।**दूध सर्प को नहीं पिलाना।सर्प हवा पीकर भी वर्षों जिंदा रहते हैं।किसी गरीब को दूध की वर्फी,दूध की खीर या अस्पतालों में रोगियों को दूध पिलाकर दूध का सदुपयोग व खुद के लिए पुण्य अर्जित करें।
आप सबको मेरी ओर से पावन 🌳 नागपंचमी 🌳 की शुभकामनाएं
🏵️ *आचार्य सुरेश🏵️*