वैदिक रीति से मनाया गया जन्म दिवस

🌹 ओ३म् 🌹
🔥 *जन्म दिवस*🔥
श्रीयुत् देवेन्द्र द्विवेदी जी ने अपनी *तनया ब्रह्मचारिणी आराध्या* का जन्म दिवस कार्यक्रम वैदिक रीति से सम्पन्न कराया!
🪷 *धर्म जिज्ञासा*🪷
ये *वैदिक रीति* क्या होती है?
🌸 उत्कृष्ट समाधान 🌸
जब ईश्वर ने सृष्टि की उत्पत्ति की उसी समय मनुष्य को संसार में किस तरह से रहना है? क्या विधि है? और क्या निषेध है उसके लिए एक *आचार संहिता* भी बनाई ।उस आचार संहिता का नाम है *चार वेद* सत्य सनातन वैदिक धर्म में जो भी कर्मकांड किये जाते हैं वो इन वेदों के आधार पर ही कराये जाते हैं इनकी जो विधि है उसी का नाम है 📚 *वैदिक विधि* ।
वेदों में मानव कल्याण हेतु *केवल १६ संस्कार* का ही प्रावधान है मगर *महाभारत युद्ध* में वैदिक व्यवस्था चरमरा गई और नाना प्रकार के कर्म काण्ड जिसमें *कुछ पारंपरिक , कुछ स्वदेशी, कुछ विदेशी सब खिचड़ी* हो गया है।ऐसी समस्या के लिए वैदिक विद्वानों ने विदेशी परंपराओं को पुरुषार्थ द्वारा अधिक से अधिक वैदिक बनाने का काम करके *वेदिक संस्कृति* की प्रेरणा लोगों में दी जाती है।इसी क्रम में जन्म दिवस को भी वैदिक संस्कृति में ढालने का काम किया जाता है।
🏵️ *धर्म जिज्ञासा*🏵️
जन्म दिवस में वैदिक विधि क्या है?
🌸 *उत्कृष्ट समाधान*🌸
जिसका जन्म दिन हो उसी को यजमान बनाया जाए। साथ में परिवार भी प्रसन्न मन से बैठे।आस पास के परिवारों को भी आमंत्रित करें। वैदिक विद्वान बुलाकर *शुद्ध समाग्री, शुद्ध समिधा, शुद्ध घी, शुद्ध वेद मंत्रों का पाठ कर* यज्ञ करें। यज्ञ के उपरांत सभी जन्मदिन पर वेदोपदेश सुनें। पुनः यजमान को वेद मंत्रों से आशीर्वाद दें। भारतीय संस्कृति के अनुसार ईश्वर भक्ति के गीत व महिला संगीत का आयोजन भी कर सकते हैं *भारतीय संस्कृति के पकवान *हलवा,पूरी,खीर,फल, मिष्ठान* आदि का यथासामर्थ्य प्रसाद वितरण करें। शांति पाठ। वैदिक जयघोष करके *नमस्ते 🙏* करके प्रीती पूर्वक सब को विदा करें
🏵️ *धर्म जिज्ञासा*🏵️
जन्म दिवस में अवैदिक क्या है?
🌸 *उत्कृष्ट समाधान*🌸
विदेशियों की तरह जन्म दिवस मनाना अवैदिक है। इसमें लोग होटलों में पार्टी करते हैं। डी जे पर नाचते हैं। कहीं कहीं तो *अंडा युक्त केक काटते हैं* मोमबत्ती बुझाते हैं।केक को खाने की जगह नाक पर,मुख पर लगाकर अमर्यादित व्यवहार करतें हैं। इस प्रक्रिया में *संस्कार की जगह हास्य व पाश्चात्य संस्कृति* के कुसंस्कार पढ़ते हैं।
🦚 *भव्य जन्म दिवस*🦚
ब्रह्मचारिणी *आराध्या* का जन्म दिवस बहुत ही सुन्दर विधि से सम्पन्न हुआ।वेद में आयु बढ़ाने वाले मंत्रों से आहुति दी गई। पुनः नवम जन्म दिवस पर बेटी आराध्या को *गायत्री मंत्र अर्थ सहित पढ़ाया गया और उसे अर्थ सहित याद कराने का संकल्प उनकी *माता श्रीमती कविता एवं पिता श्री देवेन्द्र द्विवेदी* जी ने किया।
अतः वैदिक विधि में सारे संस्कार घर पर ही कराने की प्रेरणा हैं क्योंकि *घर एक मंदिर* है। संस्कार उस *मंदिर* की शोभा है। समस्त दशहरा बाग के माताओं बहनों ने *ब्रह्मचारिणी आराध्या* को आशीर्वाद दिया।
आचार्य सुरेश जोशी
🏵️ वैदिक प्रवक्ता 🏵️

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