🌹 *ओ३म्* 🌹
📚 वैदिक शंखनाद 📚
आर्यावर्त साधना सदन पटेल नगर दशहराबाग बाराबंकी के तत्वावधान में 💒 *ग्राम शालेनगर*💒 में दो दिवसीय 🌴 सत्य सनातन वैदिक धर्म 🌴 का प्रचार कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें निम्न कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
🌼 *यज्ञोपवीत संस्कार*🌼
[१] श्रीमती ज्योति तिवारी।
[२]श्रीयुत अजय तिवारी।
🌻 *व्यसन त्याग संकल्प* 🌻
[१] श्रीयुत कृष्ण कुमार
तिवारी जी।
[२] श्रीयुत अजय
तिवारी जी।
🔥 *यजमान दंम्पति*🔥
[१] श्रीमती शांति एवं
श्री रमेश तिवारी।
[२] श्रीमती ज्ञानवती
एवं कृष्ण तिवारी।
[३] श्रीमती ज्योति एवं
श्री संजय तिवारी
[४] श्रीमती रागिनी एवं
श्री अजय तिवारी
[५] श्रीमती सांवरी एवं
श्री आशुतोष दीक्षित
[६] श्रीमती उर्मिला एवं
श्री राम सुजान शर्मा
[७] श्रीमती मीरा एवं
श्री राम विधान शर्मा
[८] श्रीमती एवं श्रीयुत
हरेंद्र सिंह ठाकुर।
🪷 *यजमान प्रमुख*🪷
श्रीमती ज्योति एवं
श्रीयुत शिवम तिवारी
🏵️ *कार्यक्रम विवरण*🏵️
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में *वृहद यज्ञ* सम्पन्न हुए। यज्ञ क्या है इस विषय पर *यज्ञ के ब्रह्मा* ने बताया यज्ञ के दो प्रारुप होते हैं।
🌸 एक भौतिक अर्थ 🌸
भौतिक अर्थ में यज्ञ के तीन चरण होते हैं।प्रथम देव पूजा।देव पूजा का मतलब ३३ कोटि देवता जिनमें *आठ वसु+१२ आदित्य+११रुद्र+१इंद्र+१यज्ञ = इन तैंतीस कोटि देवताओं* यज्ञ को हवि प्राप्त होती है।
द्वितीय संगतिकरण अर्थात् यजमान, पुरोहित और हवि का मिलकर यज्ञाग्नि को प्रज्वलित करना *संगतिकरण* कहाता है।
तृतीय चरण है दान। दान का मतलब यजमान को अपने पुरुषार्थ की कमाई से यथा सामर्थ्य आचार्य को दक्षिणा दान व धर्म कार्यों में अन्न,धन,द्रव्यादि का सहयोग *दान* कहलाता है।
🌸 दो आध्यात्मिक अर्थ 🌸
अध्यात्म में अपने बड़े योग्यता वाले माता-पिता आचार्य विद्वानों का सम्मान *देव पूजा* कहाता है।
अपने समकक्ष नर/नारियों के साथ मित्रता *संगतिकरण* कहाता है।
अपने से छोटे बच्चों व संबंधियों से प्रेम-प्रीतिपूर्वक व्यवहार करना *दान* कहाता है।
🏵️ *कार्यक्रम का द्वितीय सत्र*🏵️
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में वैदिक भजनोपदेशिका पंडिता रुक्मिणी देवी ने *ईश्वर भक्ति, सामाजिक कुरोतियों व आध्यात्मिक उन्नति के सुमधुर* भजनों द्वारा उपस्थित जनसमुदाय का मार्ग दर्शन किया।इसी क्रम में सुश्री रंजना अवस्थी जी ने भी भजन सुनाया।
✈️ *वैदिक उपदेश* ✈️
ईश्वरीय वाणी वेद 📚 ने मानव निर्माण की सर्वोत्कृष्ट विधि *संस्कारों* को बताया है। संस्कार का अर्थ है जीवन को *शत-प्रतिशत* विकसित करना।इस विकास के तीन स्तर हैं।पहला शारीरिक विकास जिसके लिए *व्यायाम, भ्रमण,योगासन, आहार, निद्रा व ब्रह्मचर्य* मुख्य अंग हैं।
विकास का दूसरा स्तर है आत्मिक जिसमें *संध्या, स्वाध्याय, आत्म-निरीक्षण चिंतन* मुख्य अंग हैं।
विकास तीसरा स्तर है जिसमें *चरित्र, परोपकार,समाज सेवा* मुख्य अंग हैं।
इस प्रकार 🪷। *ग्राम शाले नगर, ग्राम न ई बस्ती आदि अनेक ग्रामीण अंचल के नर/नारियों ने प्रतिभाग किया। वैदिक धर्म की महत्ता को समझते हुए सभी धर्म जिज्ञासुओं ने आज के युग में *आर्य समाज व सत्य सनातन वैदिक धर्म* की आवश्यकता पर बल दिया। भविष्य में ऐसे आयोजनों की महती आवश्यकता बताई गई।
🍁 *कार्यक्रम संयोजक*🍁
कृष्ण कुमार तिवारी
ग्राम शाले नगर बाराबंकी उत्तर प्रदेश।