आप ही का नाम लेकर चल रही हैं धड़कनें,, यासमीन मूमल,,


अनुराग लक्ष्य, 18 मई
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,
मुम्बई संवाददाता।
इसमें कोई संदेह नहीं कि साहित्य और अदब एक ऐसी खुशबू है, जिससे इंसान की ज़िन्दगी में बहार आ जाती है, साथ ही वोह अपनी कलम की ताकत से समाज में एकता भाईचारगी का मार्ग भी प्रशस्त करता है। ऐसे ही नामों में एक नाम उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले की रहने वाली शायरा और कवित्री यासमीन मूमल का आता है، जो भारत ही नहीं विदेशों में भी अपनी शायरी और कविताओं से लोगों के दिलों पर राज कर रही हैं। आज उन्हें की एक गज़ल आपकी समा अतो के हवाले कर रहा हूं,,,

1/धड़कनों को याद हैं बातें ज़बानी आपकी।
इसलिए मुमकिन नहीं यादें भुलानी आपकी।।

2/आईना बनने का इतना शौक़ भी मत पालिये।
जान ले लेगी किसी दिन हक़बयानी आपकी।।

3/चूमकर होंठों से अपने दे गये थे जो हमें।
जान से प्यारी है हमको वो निशानी आपकी।।

4/आपसे बिछड़े हुए यूँ तो ज़माना हो गया।
साथ हैं अब भी मगर यादें पुरानी आपकी।।

5/आप ही का नाम लेकर चल रही हैं धड़कनें।
हो गयी है जब से दिल पर हुक्मरानी आपकी।।

6/आपके ही दम से ज़िंदा है अभी तक “यासमीं”।
ख़ून की हर बूँद में है बस रवानी आपकी।।

 

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