सपा में जब तक रहा पार्टी की मजबूती के लिए ईमानदारी से किया कार्य
अपने राजनैतिक जीवन में सर्व समाज को सम्मान और अधिकार दिलाने के लिए किया हूं संघर्ष
जितेन्द्र पाठक
संतकबीरनगर – पूर्व विधायक दिग्विजय नारायण उर्फ जय चौबे ने शुक्रवार को समाजवादी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्याग पत्र दे दिया। लखनऊ स्थित सपा कार्यालय पर खुद के साथ ही अपने कार्यकर्ताओं की हुई उपेक्षा के चलते उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दिया है। शुक्रवार को जिला मुख्यालय स्थित अपने कैंप कार्यालय पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में श्री चौबे ने अपने इस्तीफे की घोषणा किया। पत्रकारों से वार्ता के दौरान श्री चौबे ने कहा कि सर्व समाज के सम्मान और अधिकार के लिए संघर्ष करना ही उनकी सियासत का मूलमंत्र रहा है जो न तो कभी भाजपा को रास आई और न ही सपा को। भाजपा का विधायक रहते हुए जब बलिराम यादव को जिला पंचायत अध्यक्ष और मुमताज अहमद की माता जी को सेमरियावां ब्लॉक का प्रमुख बनाने का प्रस्ताव रखा तो भाजपा ने अपने सबका साथ सबका विकास के नारे को ताक पर उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। जिसके चलते मुझे भाजपा से बगावत करके दोनो को समाजवादी पार्टी के समर्थन से चुनाव लड़ना पड़ा। जिले की आवाम के आशीर्वाद से दोनो लोग सत्ता पक्ष के लाख प्रयास के बाद भी चुनाव जीते। श्री चौबे ने कहा कि समाजवादी पार्टी में रहकर जब जगत जायसवाल को खलीलाबाद नगरपालिका के चेयरमैन पद का चुनाव लड़ाने का संकल्प लिया तो सपा के कुछ नेताओं ने मेरे सर्व समाज के सम्मान के संकल्प को कुचलने का प्रयास करते हुए टिकट कटवाने का प्रयास किया। अंततः कड़े परिश्रम और आवाम के आशीर्वाद से टोटी चुनाव निशान के बावजूद ऐतिहासिक मतों से श्री जायसवाल को सफलता हासिल हुई। उन्होंने कहा कि अपने संसाधनों से लगातार पार्टी की मजबूती के लिए काम करने के बावजूद पहले तो 2022 के विधानसभा चुनाव में उनको टिकट नहीं लेने दिया गया। तमाम संघर्ष के बाद किसी तरह टिकट तब मिला जब चुनाव हाथ से निकल गया। श्री चौबे ने कहा कि इस लोकसभा चुनाव में अपनी दावेदारी करते समय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी से उन्होंने पहले ही कहा था कि पार्टी पारदर्शी सर्वे करा ले यदि सर्वे में मैं चुनाव लडने लायक दिखूं तो मुझे चुनाव लड़ाया जाय। क्षेत्र में सम्मानित आवाम की तरफ से मिल रहे अथाह प्रेम और आशीर्वाद की पुष्टि होने के बाद भी एक ऐसे व्यक्ति को टिकट दे दिया गया जो न तो कभी कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा रहा और न ही कभी पार्टी की मजबूती के लिए धरातल पर नजर आया। गुरुवार को पार्टी कार्यालय पर जिस तरह से हमारे कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हुई उससे आहत हो कर मैने पार्टी से इस्तीफा दिया है। श्री चौबे ने आरोप लगाया कि पार्टी में संघर्ष और समर्पण की कोई कीमत नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के प्रति निष्ठा और समर्पण के बाद मेरा ब्राम्हण होना ही पार्टी के लिए मेरा सबसे बड़ा गुनाह नजर आया। भविष्य की योजनाओं के सवाल पर श्री चौबे ने कहा कि अपने समर्थकों, शुभचिंतकों और सहयोगियों से राय मशविरा करने के बाद उनका जो भी आदेश होगा उस पर एक सप्ताह के भीतर ही आगे की रणनीति बनाकर सर्व समाज के उत्थान के लिए आजीवन संघर्ष करूंगा।