रामायण भगवान का घर

बस्ती  । ‘बिनु सत्संग विवेक न होई ’ सत्संग में बैठकर गुरु के शरणागत होकर उनसे वह सब प्राप्त करो जो आपके जीवन को धन्य कर दे और आपका जीवन सफल हो सके। भक्ति के मार्ग में अहंकार का कोई स्थान नही है। भक्त का जिस रूप में समर्पण होगा उसे परमात्मा की छवि उसी अनुरूप दिखायी पड़ेगी। जीवन के जो चारो घाट और दिशायें हैं उसमें श्रीराम कथा की मानस गंगा प्रवाहित है। ज्ञान गंगा, भक्ति और उपासना की त्रिवेणी गंगा, यमुना, सरस्वती हमारे मानस को नवीन दृष्टि देती हैं। यह सद् विचार कथा व्यास रूद्रनाथ मिश्र ने श्रीराम जानकी मंदिर निपनिया चौराहा में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के निमित्त  दसकोलवा में आयोजित 9 दिवसीय श्री शिव शक्ति महायज्ञ और श्रीराम कथा में व्यक्त किया।
महात्मा जी ने कहा कि रामायण भगवान का घर है। कथा की सार्थकर्ता है कि जीव की व्यथा दूर हो। मानस में संसार का ऐसा कोई प्रश्न नही जिसका समुचित उत्तर निहित न हो। प्रयागराज और नदियों की महिमा का वर्णन करते हुये महात्मा जी ने कहा कि श्रीराम कथा से जीव सुधरता है और कुविचार के स्थान पर सुविचार का जन्म होता है। समय, सम्पत्ति और शक्ति का जो सदुपयोग करे वह देवता और दुरूपयोग करने वाला दैत्य है।
ब्रम्हलीन बाबा महादेव दास की स्मृति में आयोजित 9 दिवसीय आध्यात्मिक अनुष्ठान  में मुख्य रूप से प्रभात शास्त्री, आशुतोष दास, आदित्यदास, नीरज दास, ऋतिक दास, ओम नरायन, संगम शुक्ल, मुख्य यजमानगण दयाशंकर, राजकुमारी, नागेन्द्र मिश्र , राम सोहरत, शान्ती देवी, कौशल कुमार, कुसुम, सुनील पाण्डेय, मीरा देवी, सुल्ताना बाबा, सरोज मिश्र के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त शामिल रहे।

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