शरीर यज्ञ के लिए है- आचार्य सुरेश जोशी

🌈🌈 ओ३म् 🌈🌈
🌻शरीर यज्ञ के लिए है🌻
आर्य समाज मंदिर गजाधर पुर जनपद संत कबीर नगर के वार्षिकोत्सव के द्वितीय दिवस की प्रथम पाली में अग्निहोत्र विज्ञान पर चिंतन देते हुए बताया कि 🌴 इयं ते तनू यज्ञिया:🌴 अर्थात् भगवान ने अनन्त योनियों में मानव योनि ही एक ऐसी योनि है जो यज्ञ करने का सौभाग्य प्राप्त किया है। पर्यावरण चक्र व ओजोन परत को संतुलित रखने के लिए यज्ञ अनिवार्य कर्त्तव्य है।
लोग शंका करते हैं कि थोड़े से हवन से इतने बड़े संसार की शुद्धि कैसे संभव है? मैं उनसे पूछता हूं कि छोटी सी 🌿 बीड़ी व सिगरेट 🌿 का धुआं दुर्गन्ध कितने दूर तक फैलाते हैं। अग्नि में जलने वाली लाल मिर्च कितने दूर तक वायु को दूषित करता है इसमें किसी को आपत्ति नहीं फिर 🔥 यज्ञ की सुगंधि 🔥 से समस्या क्यों?
जो लोग पदार्थ विद्या से अनभिज्ञ हैं उनको ही ऐसी अविद्या जनक शंका होती है। 🍁अग्नि विद्या के तीन रूप🍁
जब आप यज्ञ करते हैं उसमें पढ़ने वाली आहुतियां तीन रुप में परिवर्तित होती है।पहला भस्म🌸दूसरा सुगंधि 🌸और तीसरा संस्कार 🌸
जब समिधाएं घृत औषधियों के सहयोग से समिधा जलती हैं तो भस्म बन जाती हैं। पुनः सुगंधि भू-लोक से द्यु लोक तक पहुंचती है।अंत बचता है संस्कार जो पुनर्जन्म में पहुंचता है। इसलिए यज्ञ मानव मात्र को करना चाहिए।
आचार्य सुरेश जोशी

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