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2122 2122 212
दर्द दिल का अब भुलाना आ गया।
आंसुओं में अब नहाना आ गया।
ज़िन्दगी से खेलते बाजी रहे।
जीत कर भी हार जाना आ गया।
ज़िन्दगी भर जि़न्दगी से चुप रहे।
मौत आई मुस्कुराना आ गया।
हम छुपाते और छुपते ही रहे।
इस तरह ग़म को छुपाना आ गया।
प्यार उनका पा सके हम तो नहीं।
प्यार के किस्से सुनाना आ गया।
एक तरफा ही सही पर प्यार था।
मैं नहीं करती ये कहना आ गया।
हम नहीं का़बिल या वो का़बिल नहीं।
ये ज़माने को बताना आ गया।
जो नहीं था प्यार मेरा देखिए।
अब “सखी “अपना बनाना आ गया।।
अंजना सिन्हा “सखी “
रायगढ़