ग़ज़ल
भरी महफ़िल में चर्चा आम होगा
लबों पर तेरे मेरा नाम होगा
मदद खुल कर किया करता है सबकी
मगर वो आदमी गुमनाम होगा
अगर करते हो तुम भी दिल से उनका
तुम्हारा भी वही इकराम होगा
हमारा कुछ बिगाड़ेगा न दुश्मन
कोई माकूल जब इकदाम होगा
कहा ज़ालिम को मैंने खुल के ज़ालिम
नहीं मालूम क्या अंजाम होगा
बुराई से नहीं गर तुम बचोगे
तुम्हारा नाम भी बदनाम होगा
किया है फ़ोन उसने आज मुझको
यकी़नन ख़ास कोई काम होगा
करोगे ज़िन्दगी में काम अच्छे
तुम्हारा नाम भी तो आम होगा
कहोगे शेर अच्छे तुम जो आज़िम
तुम्हारा शायरी में नाम होगा
किए ज़ालिम ने कितने ज़ुल्म आज़िम
बहुत उसका बुरा अंजाम होगा
अब्दुल सलाम आज़िम सरधनवी हिन्द ✍️