मुबारक होली

तन का तार भिगोने से क्या होगा।

मन का तार मिले तो हो होली।

 

उल्लास से मनाने से क्या होगा।

हर गिले शिकवे मिटे तो हो होली।

 

फूलों से रंगने से क्या होगा।

तुम अपने रंग में रंगो तो हो होली।

 

केसर वाली ठंडाई से क्या होगा।

मीठे प्रेम का नशा चढ़े तो हो होली।

 

टेसू का रंग डालने से क्या होगा।

पानी बचाओ तो हो होली।

 

रंगीन पिचकारी से क्या होगा।

बिन दहेज हो शादी तो हो होली।

 

नदिया लबालब भरे तो क्या होगा।

जीवन उलझन मिटे तो हो होली।

 

होली में गाली देने से क्या होगा।

मन की शांति मिले तो हो होली।

 

अब ऐसी बातें करने से क्या होगा।

श्रेया सबको कहती मुबारक हो होली।

तत्वदर्शी रचनाकार

डॉ अर्चना श्रेया

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