
अनुराग लक्ष्य, 18 मार्च
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,
मुम्बई संवाददाता ।
, रमज़ान का महीना बड़ी रहमतों का है
यह रहमतों के साथ बड़ी अज़मतों का है
रोज़े रखो, नमाज़ ए तरावीह भी पढ़ो
रमज़ान का महीना बड़ी बरकतों का है ,
उपरोक्त चार पंक्तियों पर अगर आप गौर करें तो आपको यही महसूस होगा कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने इस महीने पर अपना खास करम फरमाया है। साथ इंसान की ज़िन्दगी को अपनी तमाम नेमतों से भी नवाज़ा है। लेकिन बाज़ार जब आम दिनों से अलग हटकर अपनी मंहगाई का तांडव कर रही हो तो बनदा ऐसे हालात में इन सारी नेमतों का लुत्फ कैसे उठा सकता है।
रोजेदार रोज़े को खोलने के सिलसिले में जब शाम को अपने मुहल्ले के सब्ज़ी और फल की दुकान पर जब पहुंचता है तो उसे मंहगाई के साथ मायूसी ही हाथ लगती है। वजह सिर्फ सब्ज़ी और फलों के दामों में बढ़ोतरी।
मुंबई संवाददाता सलीम बस्तवी अज़ीज़ी ने जब इस बाबत कुछ सब्ज़ी और फलों के विक्रेताओं से बात की तो यही बात उभर कर सामने आई, और एक स्वर में यही बोले कि यहां वाशी सानपाडा के थोक मण्डी तेज़ है। हम क्या कर सकते हैं, जब हमें वहां की थोक व्यापारी से ज्यादा दाम पर फल और सब्जियां खरीदने पड़ रहें हैं तो हमें भी मजबूरन उन्हें कुछ बढ़ाकर ही बेचना पड़ेगा।
सब्ज़ियों के बढ़े मूल्य के साथ फलों में केला, सब, अंगूर, तरबूज, खरबूज से लेकर पपीते के दाम भी आम दिनों से ज़्यादा भाव पर लेने के लिए लोग बाध्य हैं, क्योंकि रोज़ा चल रहा है।