भक्ति क्या है?- आचार्य सुरेश जोशी

🌴🌴 ओ३म् 🌴🌴
🕉️🕉️ भक्ति क्या है? 🕉️🕉️
आर्य समाज मंदिर गांधी नगर बस्ती के १०५ वें वार्षिकोत्सव के तृतीय दिवस के प्रथम सत्र में देव यज्ञ के साथ वैदिक सत्संग में आज 🌻 ईश्वर भक्ति 🌻क्या है इस विषय पर वैदिक दृष्टिकोण स्पष्ट किया गया।
लोग भक्ति का अर्थ प्रायः कीर्तन, भजन गाना। तीर्थों में स्नान, पूजा-पाठ करना समझते हैं। वास्तव में भक्ति का इस कर्मकांड से कोई संबंध नहीं है।
भक्ति 🍁 भज् सेवायाम् 🍁 इस धातु से बना है।इसका अर्थ है ईश्वर की सेवा यानि उसकी आज्ञाओं का पालन करना ही वास्तव में 🌸ईश्वर भक्ति 🌸 कहलाता है।
जो परमात्मा 🌴 सर्वत्र 🌴 है उसे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा,चर्च में 🌴 एकत्र 🌴 करना असंभव है। जो ईश्वर आजाद है उसे कमरे में रखकर गुलाम बनाना संभव नहीं है।जो सबका बाप है उसका बाप मनुष्य कैसे हो सकता है!जो सबको प्राणवान बनाता उसमें प्राण कौन डाल सकता है? अर्थात् कोई नहीं।
वर्तमान में भक्ति पांच प्रकार से हो रही है।
🌼🌼 स्वार्थ भक्ति 🌼🌼
इस भक्ति के तीन भेद हैं।
(१) अपने स्वार्थ की पूर्ति करने के लिए किसी पशु -पक्षियों की बलि देना।इसे बलि प्रथा कहते हैं।
(२) आडंबर।किसी भक्त को मंदिर में आते देखकर पुजारी का आंख बंद करके ध्यान लगाने की आदत।इसे बगुला भक्ति कहते हैं।
(३) व्यापार बढ़ाने के लिए अगरबत्ती घुमाकर चारों ओर घुमाना। फिर पैंसे को पिटारी में घुमाकर है।माता टेककर पेंटी में डालना।ये प्रदर्शन है।
🌼🌼 परमार्थ भक्ति 🌼🌼
परोपकार,सेवा से समाज सेवा करना। परहित जीना। परहित मरना। जिसमें ये गुण हों जाते हैं वो योगी बन जाते हैं।
🌼🌼 आंतरिक भक्ति 🌼🌼
हृदय की प्रेरणा सुनकर ईश्वर के ध्यान में बैठने के लिए पुरुषार्थ करना इसमें तीन चीजें स्वयं होने लगती हैं।तप, ज्ञान व तितीक्षा
🌼🌼 संबंधित भक्ति 🌼🌼
इसमें उपासक परमात्मा से पांच संबंध बनाता है।
(१) ईश्वर माता है।(२) ईश्वर पिता है।(३) ईश्वर आचार्य है।(४) ईश्वर हमारा राजा है।(५) ईश्वर व्यापक व हम व्याप्य हैं।
🌼🌼 वैदिक भक्ति 🌼🌼
अपनी सकल उत्तम सामग्री यानि शुद्ध शरीर, शुद्ध मन, शुद्ध बुद्धि द्वारा विशेष भक्ति। जिसमें पंचमहायज्ञ,व अष्टांग योग आता है।यही ईश्वर की सेवा यानि आज्ञा है। महाभारत काल तक संपूर्ण विश्व में यही भक्ति की एक मात्र पद्यति थी।
अतः ईश्वर के गुणों का ध्यान कर।उसे समझकर उस पर आचरण करना ही सच्ची ईश्वर भक्ति है।
कार्यक्रम में प० नेम प्रकाश त्रिपाठी आधुनिक अर्जुन लखनऊ व पंडिता रुक्मिणी जोशी वैदिक भजनोपदेशिका बाराबंकी ने ईश्वर भक्ति के सुमधुर वैदिक भजन सुनाकर भक्ति रस का पान कराया।
🌸आज के प्रतिष्ठित याज्ञिक
[१] श्रीमती सीमा
श्रीमान शिवम्।
[२] श्रीमती संगीता
श्रीमान गणेश।
[३] श्रीमती उमा
श्रीमान सत्येन्द्र वर्मा।
[४] श्रीमती अन्नू।
श्रीमान संतोष महादेवा
[५] माता सुमन जी।
वैदिक उपासना स्थल
आवास विकास परिषद।
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आचार्य सुरेश जोशी
🍁 वैदिक प्रवक्ता 🍁

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