मेरे बुजुर्गो के सर की पगड़ी जो हो सके तो बचाए रखना


अनुराग लक्ष्य, 29 नवंबर
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,
मुंबई संवाददाता ।
,,मेरे बुजुर्गो के सर की पगड़ी जो हो सके तो बचाए रखना,
दिलों में उनकी नसीहतों के जो फूल हैं वोह खिलाए रखना,
यह वक्त ऐसा ही आ गया है कि फिक्र करने की है ज़रूरत,
किसी भी सूरत में अपने घर को मुहब्बतों से सजाए रखना,,,,
तारीख शाहिद है और इतिहास साक्षी है कि इंसान इस दुनिया से रुखसत हो जाता है, लेकिन उसका किरदार और अच्छा अमल इस दुनिया में हमेशा ज़िंदा रहता है। जी हां, आज इस खबर को लिखते वक्त मेरे ज़हन में मेरा यही शेर आया, क्योंकि जिस शख्सियत की याद में यह जलसा मुनक्किद किया गया था वोह इसी किरदार की शख्सियत थे। दुनिया ए अदब जिन्हें हाफिज़ वकील अहमद खान के नाम से जानती और पहचानती थी, और जिन्होंने 35 साल तक धारावी की नुरुल हुदा मस्जिद में पेश इमाम की भूमिका निभाई।
बीती रात धारावी 90 फिट पर हाफिज़ वकील अहमद फाउंडेशन की जानिब से मरहूम हाफिज़ वकील अहमद खान की याद में यह जलसा मुनक्किद किया गया, जिसमें धारावी की आवाम ने बड़ी तादाद में शिरकत करके अपनी अपनी खेराज ए अकीदत और मुहब्बतों का नज़राना पेश किया। उल्मा हजरात ने मरहूम हाफिज़ वकील अहमद खान की शख्सियत पर रोशनी डालते हुए उन्हें आज का एक सच्चा आलम ए दीन और मुजाहिद बताया।
नातिया कलाम का दौर भी खूब चला, जिसमें इम्तियाज शेख, यूसुफ शेख, मौलाना समर, फरीद शेख, मौलान जुनैद, सहित तमाम लोगों ने नात ए मुस्तफा और मनकबत पेश करके खूब समा बांधा, जिसे समायीन हजरात ने खूब दाद ओ तहसीन से नवाज़ा।
यह जलसा अल्हाज सैयद मोईन मियां अशरफी जीलानी की सरपरस्ती में आयोजित किया गया और बतौर मेहमान ए खुसूसी उपस्थित रहे रजा एकेडमी के रूह ए रवां सईद नूरी साहब। जलसे की खेताबत खास तौर पर हज़रत ए अल्लामा मौलाना अमानुल्लाह अजमल हुसैन, हज़रत ए अल्लामा मौलाना हजरत ए अमजद हुसैन मिस्बाही और हजरत ए अल्लामा मौलाना अमानुल्लाह रज़ा साहब ने की। जलसे को कामयाब बनाने में हाफ़िज़ वकील अहमद फाउंडेशन के तमाम पदाधिकारियों की भूमिका सराहनीय रही।

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