योग से ही दुखों पर होगी विजय- वेदामृतानंद सरस्वती*

*योग से ही दुखों पर होगी विजय- वेदामृतानंद सरस्वती*
*स्वर्ण जयंती समारोह में आर्य वीरों का शौर्य प्रदर्शन कल*
योग से ही दुखों पर विजय प्राप्त की जा सकती है। अष्टांग योग मानव जीवन को मोक्ष तक पहुंचाने का उत्तम मार्ग है। यह उद्गार आर्य समाज नई बाजार बस्ती के स्वर्ण जयंती समारोह में स्वामी वेदामृतानंद सरस्वती ने अष्टांग योग पर बोलते हुए व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह के पालन से हम शारीरिक दुखों से छूट जाते हैं और शौच संतोष तप स्वाध्याय और ईश्वर प्रणिधान से हम मानसिक दुखों से छूट जाते हैं। योग के बिना जीवन में सुख और शांति पाना असंभव है अगर परमात्मा के दर्शन करने हैं तो अष्टांग योग के माध्यम से ही परमपिता परमात्मा का साक्षात्कार किया जा सकता है। मन की चंचलता को रोकने के लिए अष्टांग योग का ही सहारा लिया जा सकता है। इससे पूर्व वैदिक यज्ञ में अलख निरंजन, मनोज अग्रवाल, विवेक गिरोत्रा सपरिवार यजमान रहे। समारोह में पंडिता रुक्मिणी देवी ने *ईश्वर के वैदिक स्वरूप* विषय पर अपने भजनोपदेश प्रस्तुत कर लोगों को ईश्वर के मुख्य नाम ओम को ग्रहण करने योग्य बताया। ओम नाम की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि सत्यार्थ प्रकाश में स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा ईश्वर के 100 नामों की व्याख्या की है जिसमें जिसमें ओम नाम शिरोमणि है। इसके जाप करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
डॉ अशरफी लाल शास्त्री ने *वेदो अखिलो धर्ममूलम* विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि वेद संपूर्ण ज्ञान से भरा हुआ है उसे समझने और जानने की आवश्यकता है। सूर्य की पहली किरण जब धरती पर फूटी थी तो उसी समय वेद का प्रादुर्भाव हुआ था। हमारे ऋषियों ने परमपिता परमात्मा की वाणी को सुनकर वेद में उन तथ्यों को समाहित किया है। वेद परमात्मा की वाणी है समाज और जगत के कल्याण का रास्ता वेद बताता है। पंडित भीष्म देव ने अपने भजन के माध्यम से *वेद पढ़ो और पढ़ाया करो वेद सुनो और सुनाया करो* शास्त्रीय संगीत के आधार पर भजन को सुना कर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। पंडित भीष्म देव ने कहा कि गुरु नानक साहिब ने कहा था कि वेद के मार्ग पर जो चलेगा उसके जीवन में कभी अंधेरा नहीं रह सकता । प्रोफेसर व्यास नंदन शास्त्री ने धर्म और मानवता के विषय पर बड़ी गहनता के साथ श्रोताओं के मध्य में अपनी बात को रखते हुए कहा कि मध्यकालीन के विद्वानों ने वेद के मंत्रों के अर्थ को गलत ढंग से प्रस्तुत किया था जिससे समाज में विकृतियां फैल गई इन विकृतियों को रोकने के लिए ही स्वामी दयानंद ने सत्यार्थ प्रकाश के माध्यम से सत्य, असत्य को समझाने का प्रयास किया प्रत्येक व्यक्ति को सत्य ग्रहण करना चाहिए और असत्य को छोड़ने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। कार्यक्रम के अंत अध्यक्षता कर रहे चिकित्सक संतोष कुमार सिंह ने कहा कि हमें आर्य समाज के जो 10 नियम बताए गए हैं उन नियमों का पालन करना चाहिए वेद को पढ़ते हुए सत्य के मार्ग पर चलने का निरंतर प्रयास करते रहना चाहिये। ओम प्रकाश आर्य ने बताया कि यह समारोह आम जनमानस में वैदिक धर्म की स्वीकार्यता को बढ़ाएगा। संस्था निरन्तर ऐसे कार्य करती रहेगी।कार्यक्रम में गिरिजाशंकर द्विवेदी, आदित्यनारायण गिरी, शिव श्याम, नितीश कुमार, अनीशा, साक्षी, महक, यशस्पति अग्रवाल, उपेंद्र शर्मा, राम लखन आर्य, जमुना पाण्डेय, शेष कुमार, उमाशंकर, अरुण कुमार, अनीता सिंह, शिवपूजन आर्य, संतोष कुमार, पवन कुमार, अजीत कुमार पांडेय, सत्यनारायण आर्य, अंश आर्य, आदित्य आर्य, श्री राम सिंह, संतोष कुमार आर्य, श्री राम आर्य, श्री राजेंद्र आर्य, लक्ष्मी नारायण, पंडित लालमणि शर्मा, आदित्य प्रसाद आर्य, हरिहर प्रसाद आर्य, रामदौर आर्य, अखिलेश आर्य, मनोज कुमार यादव, नीलिमा श्रीवास्तव, कलावती आर्य, लक्ष्मी सोनी, गीता आर्य, मंजू, किरण बाला, सीमा, सुशीला सुमन, रूपाली देवी, पुष्पा देवी, रेखा श्रीवास्तव, अमरावती देवी, उमा श्रीवास्तव, कृष्णा अग्रवाल, चंद्रकला दुबे, रश्मि आर्य, उर्मिला बरनवाल, दिनेश मौर्य, अरविन्द श्रीवास्तव सहित अनेक लोग सम्मिलित हुए।
गरुण ध्वज पाण्डेय। संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन आचार्य सुरेश जोशी ने किया आचार्य के ही प्रयास से कई जनपदों से आर्य समाज के लोग इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *