अनुलोम-विलोम प्राणायाम से तन , मन और जीवन सुखमय होता है : योगाचार्य राम मोहन पाल

अनुलोम-विलोम प्राणायाम से तन , मन और जीवन सुखमय होता है : योगाचार्य राम मोहन पाल

 

लवकुश सिंह संवाददाता

अनुराग लक्ष्य न्यूज बस्ती

 

बस्ती। अनुलोम-विलोम प्राणायाम योग की एक महत्वपूर्ण श्वसन क्रिया है, जो श्वास को नियंत्रित करने और मन को शांत रखने में सहायक मानी जाती है। योगाचार्य राम मोहन पाल ने अनुलोम-विलोम प्राणायाम की विधि, लाभ एवं सावधानियों के बारे में जानकारी देते हुए नियमित रूप से सही तरीके से इसका अभ्यास करने की सलाह दी। योगाचार्य राम मोहन पाल के अनुसार, सबसे पहले किसी शांत और स्वच्छ स्थान पर सुखासन या पद्मासन में बैठकर कमर एवं गर्दन सीधी रखें। अब दाहिने हाथ के अंगूठे से दाहिनी नासिका बंद करके बाईं नासिका से धीरे-धीरे श्वास अंदर लें। इसके बाद बाईं नासिका बंद करके दाहिनी नासिका से धीरे-धीरे श्वास बाहर छोड़ें। फिर दाहिनी नासिका से श्वास अंदर लेकर बाईं नासिका से बाहर छोड़ें। इस प्रकार एक चक्र पूरा होता है। शुरुआत में अपनी क्षमता के अनुसार कुछ मिनट तक अभ्यास करना चाहिए।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम से मन को शांत रखने, तनाव कम करने तथा एकाग्रता बढ़ाने में सहायता मिल सकती है। नियमित अभ्यास से श्वास पर नियंत्रण बेहतर करने और विश्राम का अनुभव करने में मदद मिलती है। यह स्वस्थ जीवनशैली और मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए उपयोगी अभ्यास है।इससे त्रिदोष संतुलित रहते हैं

योगाचार्य ने बताया कि अनुलोम-विलोम का अभ्यास बिना जल्दबाजी के सहज गति से करना चाहिए। श्वास को जबरदस्ती न रोकें और न ही अधिक जोर लगाकर सांस लें। चक्कर आने, घबराहट या असहजता महसूस होने पर अभ्यास रोक दें। अस्थमा, हृदय रोग या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित व्यक्ति चिकित्सक की सलाह के अनुसार अभ्यास करें। शुरुआती लोगों को सांस रोकने का अभ्यास नहीं करना चाहिए। नियमित अभ्यास का संदेश

योगाचार्य राम मोहन पाल ने कहा कि योग और प्राणायाम को जीवनशैली का हिस्सा बनाकर शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है। अनुलोम-विलोम का अभ्यास नियमित रूप से, सही विधि और अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार करना चाहिए।