वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच की कर्नाटक इकाई की मासिक गोष्ठी में बही भक्तिरस की धारा

वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच की कर्नाटक इकाई की मासिक गोष्ठी में बही भक्तिरस की धारा

 

कवियों की सुमधुर प्रस्तुतियों से दो घंटे तक मंत्रमुग्ध रहे श्रोता

 

बस्ती। वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच, कर्नाटक इकाई की सितंबर माह की आभासी मासिक काव्य गोष्ठी रविवार, 13 सितंबर को उत्साह एवं गरिमापूर्ण वातावरण में आयोजित हुई। गोष्ठी में मुख्य अतिथि श्रीमती इंदु राज निगम रहीं, जबकि विशिष्ट अतिथि श्रीमती पद्मा श्रीनिवासन तथा अध्यक्षता श्रीमती अनिता कुमारी ने की। कार्यक्रम में 16 कवियों ने अपनी रचनाओं एवं गीतों की प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं।

 

गोष्ठी की शुरुआत से ही भक्तिरस, सामाजिक सरोकार और हिंदी भाषा के प्रति प्रेम की विविध छटा देखने को मिली। गुड्डी जी ने कबीर की महिमा का बखान किया। विजेंद्र सैनी ने ‘जमीन से जुड़ाव’ विषय के माध्यम से लोगों को अपनी जड़ों और गांव के प्रति जिम्मेदारियों का एहसास कराया। चंद्र जी ने ‘बचपन में सीखी हिंदी’ कविता में हिंदी के अक्षरों से बनने वाले शब्दों को समाहित कर अपनी रचनात्मकता का परिचय दिया।

 

कामिनी जी ने ‘नारी तुम महान हो’ के माध्यम से नारी शक्ति का गुणगान किया, वहीं मंजू भारद्वाज ने ‘मेरे भीतर ठहरा कोई आकाश’ कविता के जरिए आत्ममंथन की भावना को अभिव्यक्त किया। मोहनलाल गंगवार ने ‘सच्चा रिश्तेदार गुरु’ भजन प्रस्तुत कर श्रोताओं को आध्यात्मिकता से जोड़ा। अरुणा राणा ने ‘कान्हा सबके मन में रहते हो’ भजन सुनाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

 

प्रबल प्रताप राणा ने ‘सूत हो तो हमारे, सच में हमसे थोड़ा प्यार करो’ के माध्यम से बच्चों की अपने माता-पिता से जुड़ी अपेक्षाओं को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। आचार्य विनीता लावण्या ने गीत के माध्यम से सूर्योदय के मनोरम दृश्य का सजीव चित्रण किया। प्रीति रही ने ‘ये जिंदगी है छोटी, मुंह मोड़ना नहीं’ गीत प्रस्तुत कर जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का संदेश दिया।

 

विशिष्ट अतिथि पद्मा श्रीनिवासन ने ‘राम जी तोरी जोवत बाट शबरी’ भजन सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। मधु माहेश्वरी ने ‘गौरा के प्यारे गणपति हमारे’ सहित हिंदी विषय पर कविता प्रस्तुत की। मुख्य अतिथि इंदु राज निगम ने ‘जैसे हो शिव नंदी, वैसी हमारी हिंदी’ कविता के माध्यम से हिंदी को विभिन्न उपमाओं से जोड़ते हुए भाषा के महत्व को रेखांकित किया।

 

रामस्वरूप कुशवाहा ने ‘कर दो कृपा सतगुरु जी’ और प्रथम पूज्य गणेश जी पर आधारित रचनाओं के माध्यम से भक्ति एवं श्रद्धा का संदेश दिया। वैश्विक अध्यक्ष राजेंद्र निगम ने ‘विष पीकर के भी मुस्काना, शिव के साथ रहकर ये रहस्य जाना’ कविता के माध्यम से जीवन की विषम परिस्थितियों को सकारात्मकता से स्वीकार कर उन्हें अमृत में बदलने का संदेश दिया। अध्यक्षता कर रहीं अनिता कुमारी ने ‘हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा’ कविता के जरिए हिंदी भाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए हिंदी के राष्ट्रभाषा बनने की आशा जगाई।

 

लगभग दो घंटे तक चली इस काव्य गोष्ठी का सफल संचालन वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच के अध्यक्ष श्री रामस्वरूप कुशवाहा ने किया। विभिन्न भावों, भक्तिरस, सामाजिक संदेशों और हिंदी प्रेम से ओतप्रोत प्रस्तुतियों ने गोष्ठी को यादगार बना दिया।