बच्चों में बढ़ता स्क्रीन टाइम बना चिंता का कारण

बच्चों में बढ़ता स्क्रीन टाइम बना चिंता का कारण

 

स्वास्थ्य, नींद और सामाजिक विकास पर पड़ रहा नकारात्मक प्रभाव, विशेषज्ञों ने दी सावधानी की सलाह

 

अनुराग लक्ष्य न्यूज

 

बस्ती। डिजिटल युग में मोबाइल, टीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का बढ़ता उपयोग बच्चों के जीवन का हिस्सा बन चुका है, लेकिन अत्यधिक स्क्रीन टाइम अब उनके स्वास्थ्य और विकास के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जरूरत से ज्यादा स्क्रीन देखने से बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

डॉ. नवजोत सिंह (बीएनवाईएस), द पॉजिटिव हीलिंग, लखनऊ के अनुसार, अधिक स्क्रीन टाइम के कारण बच्चे शारीरिक गतिविधियों से दूर होते जा रहे हैं, जिससे उनकी शारीरिक वृद्धि और फिटनेस प्रभावित हो रही है। इसके साथ ही, लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों पर दबाव और सिरदर्द जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।

मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर साफ देखा जा रहा है। अत्यधिक स्क्रीन उपयोग से बच्चों में तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके अलावा, स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट बच्चों की नींद को प्रभावित करती है, जिससे उनकी एकाग्रता और सीखने की क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ता है।

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों के सामाजिक कौशल को कमजोर कर सकता है। बच्चे परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने के बजाय डिजिटल दुनिया में अधिक व्यस्त हो जाते हैं, जिससे उनके व्यवहार और संचार क्षमता पर असर पड़ता है।

ऐसे में अभिभावकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित करना, उन्हें खेलकूद, पढ़ाई और सामाजिक गतिविधियों में शामिल करना आवश्यक है। संतुलित दिनचर्या और सकारात्मक वातावरण के माध्यम से ही बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित किया जा सकता है।