जमीन कब्जे का विवाद बना खूनी संघर्ष, पीड़ित परिवार के घर पर हमले का आरोप
प्रशासन से सुरक्षा की गुहार बेअसर, पीड़ित का दावा—कार्रवाई दबंगों पर नहीं, हम पर हुई; निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग
जितेन्द्र पाठक
संतकबीरनगर। जिले में जमीन कब्जे को लेकर चल रहा पुराना विवाद एक बार फिर हिंसक झड़प में बदल गया। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि विवादित भूमि पर अवैध कब्जे का विरोध करने पर उनके घर पर बड़ी संख्या में लोगों ने हमला कर दिया। उनका कहना है कि कई बार प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद न तो विवादित जमीन को खाली कराया गया और न ही परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। अब पीड़ित ने शासन-प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
पीड़ित दयाराम कन्नौजिया के अनुसार उनके घर के सामने स्थित जमीन पर लंबे समय से कुछ लोगों द्वारा अवैध कब्जा किया गया है। इस संबंध में कई बार राजस्व विभाग द्वारा पैमाइश और निशानदेही भी कराई गई, लेकिन इसके बावजूद कब्जा नहीं हटाया गया। उनका आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई न होने से विपक्षी पक्ष का मनोबल लगातार बढ़ता गया।
पीड़ित का कहना है कि उन्होंने जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी, तहसीलदार और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार लिखित शिकायतें देकर सुरक्षा और कार्रवाई की मांग की, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन मिला। उनका यह भी आरोप है कि पूर्व में भी उन्हें दबाव में लाने के लिए फर्जी मुकदमों का सहारा लिया गया था।
पीड़ित के मुताबिक 26 जुलाई को उनका पुत्र खेत के पास घास काटने गया था, तभी कुछ लोगों ने उस पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। इस घटना के बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद और बढ़ गया।
आरोप है कि अगले दिन 27 जुलाई की सुबह करीब 8:30 बजे बड़ी संख्या में लोग सुनियोजित तरीके से उनके घर पहुंच गए और हमला बोल दिया। पीड़ित का दावा है कि घटना से पहले इलाके की बिजली भी काट दी गई थी, जिससे परिवार पूरी तरह असहाय हो गया। हमलावरों के डर से परिवार के सदस्य घर के भीतर छिपे रहे और तत्काल पुलिस को सूचना दी गई।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद पुलिस काफी देर से मौके पर पहुंची। उनका कहना है कि करीब एक घंटे तक परिवार भय के माहौल में घर के अंदर बंद रहा। पुलिस के पहुंचने के बाद भी हमलावरों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि पीड़ित पक्ष को ही कोतवाली ले जाकर शांति भंग की आशंका में धारा 151 के तहत चालान कर दिया गया।
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि हमले में कई बाहरी लोग शामिल थे, लेकिन उनकी पहचान और भूमिका की जांच नहीं की गई। साथ ही कुछ पुलिसकर्मियों पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया गया है।
दयाराम कन्नौजिया ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि विवादित भूमि को तत्काल कब्जामुक्त कराया जाए, परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मिलकर अपनी शिकायत आगे भी उठाएंगे।
फिलहाल इस मामले में पुलिस या प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।