सरयू जयंती व छठ महोत्सव को बड़ी ही धूमधाम हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
आयोध्या । प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या में पतित पावनी माँ सरयू के तट पर छठ महोत्सव अत्यधिक आस्था, हर्षोल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया।ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर सोमवार 29 जून को अयोध्या धाम में सरयू जयंती महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। सरयू तट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच माँ सरयू की भव्य महाआरती आयोजित की गई। श्रद्धालुओं ने प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि, शांति तथा लोककल्याण की कामना करते हुए माँ सरयू की आराधना की।श्री साकेतपुरी माँ सरयू नित्य आरती सेवा समिति के तत्वावधान में अयोध्या के संत श्री तुलसीदास घाट (कच्चा घाट) पर माँ सरयू का जन्मोत्सव अत्यंत श्रद्धा भक्ति और वैदिक अनुष्ठानों के साथ धूमधाम से मनाया गया। इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने जुटकर पुण्य सलिला माँ सरयू का पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। वैदिक मंत्रोच्चार और भव्य महाआरती जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों में वैदिक मंत्रोच्चार से संपन्न कराया गया। इस दौरान माँ सरयू को 1100 कमल पुष्प अर्पित किए गए। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 51 सौ बत्तियों से की गई भव्य महाआरती रही, जिसकी अलौकिक छटा देखकर पूरा घाट भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान हो उठा। संस्कृति और परंपराओं का संरक्षणरू कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अनंत विभूषित परमपूज्य श्रीत्रिय ब्रह्मनिष्ठ दंडी स्वामी सर्व सर्वेश्वरानन्द तीर्थ महाराज सम्मिलित हुए उन्होंने कहा कि, माँ सरयू केवल अयोध्या ही नहीं, बल्कि पूरे सनातन धर्म की आस्था का केंद्र हैं। ऐसे धार्मिक आयोजन हमारी संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनते हैं। उन्होंने माँ सरयू भारतीय संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक चेतना की अमूल्य धरोहर हैं। ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार गंगा, यमुना और सरयू जैसी पवित्र नदियों को स्वच्छ और निर्मल बनाए रखने के लिए संकल्पबद्ध है।सभी श्रद्धालुओं को माँ सरयू जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।सनातन मूल्यों के प्रसार पर जोर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अध्यक्ष कृष्ण मुरारी पाण्डेय महाराज ने कहा कि माँ सरयू का जन्मोत्सव सनातन संस्कृति के संरक्षण और जन-जन में आस्था जागृत करने का महापर्व है। उन्होंने बताया कि साकेतपुरी माँ सरयू नित्य आरती सेवा समिति द्वारा प्रतिदिन माँ सरयू की भव्य आरती शास्त्री द्वारा किया जाता हैं। इस अवसर का आयोजन किया जाता है। आरती व्यवस्था के कुशल संचालन पवन गुप्ता ने कहा कि उनकी संस्था सदैव धर्म और आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण के लिए समर्पित है। ऐसे आयोजन समाज को एकता और सनातन मूल्यों से जोड़ते हैं। कार्यक्रम में अनेक संत, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने विश्व कल्याण और देश की सुख-समृद्धि की कामना की। वहीं कोषाध्यक्ष कल्लू पाण्डेय ने बताया किजिसे प्रतिवर्ष पूरे श्रद्धाभाव के साथ आयोजित किया जाता है. उन्होंने कहा कि इस छ: दिवसीय आयोजन में प्रतिदिन सरयू कथा, भजन,सुंदरकांड का पाठ सत्संग और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है,जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर माँ सरयू की महिमा का श्रवण कर रहे हैं।और 4 जुलाई को छठ महोत्सव के अवसर पर इस दौरान एक क्विंटल गुलाब, कमल का पुष्प अर्पित कर माँ सरयू का भव्य श्रृंगार और पूजन भी संपन्न कराया गया।वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सवा क्विंटल दूध से माँ सरयू का अभिषेक भी किया गया।अभिषेक में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और माँ सरयू से लोककल्याण, सुख-समृद्धि तथा विश्व शांति की कामना की। पूजन का क्रम सुबह आठ बजे शुरू हुआ और पांच घंटे तक सरयू तट वैदिक मंत्रोच्चारों से गूंजता रहा।पूजन के बाद माँ की सरयू भव्य आरती भी आयोजित की गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने दीप जलाकर माँ सरयू का आशीर्वाद प्राप्त किया।सरयू तट पर दिनभर भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने “जय मां सरयू” के जयघोष के साथ पूजा-अर्चना की और महाआरती में हिस्सा लिया।संतों ने अपने संदेश में कहा कि माँ सरयू केवल एक पवित्र नदी नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की जीवनधारा हैं। उनका जन्मोत्सव व छठ महोत्सव समाज को धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का संदेश देता है।महोत्सव का समापन भव्य महाआरती, प्रसाद वितरण और श्रद्धालुओं के मंगलकामना संकल्प के साथ हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने सरयू जयंती व छठ महोत्सव को भव्य और ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया। सरयू तट पर देर शाम तक भक्तों की भीड़ और भक्ति का उत्साह देखने को मिला।अंत में भव्य भंडारा प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। मुख्य पुजारी में माता प्रसाद, नीरज तिवारी, विकास पाण्डेय, विशाल पाण्डेय व सभी कमेटी सदस्यगण शामिल रहे।