जेठ मास में अटूट भंडारे की परंपरा, भूखों को भोजन और जीवों की सेवा ही सबसे बड़ा दान: शोभाराम निषाद

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या।धार्मिक नगरी अयोध्या में ज्येष्ठ (जेठ) माह के पावन के अवसर पर हनुमान जी की आराधना और भंडारे के आयोजन की अद्भुत धूम देखने को मिल रही है। इसी कड़ी में नगर के प्रमुख समाजसेवी शोभाराम निषाद ने अपने पूर्वजों की गौरवशाली परंपरा को जीवंत रखते हुए भव्य भंडारे का आयोजन किया। इस अवसर पर उन्होंने सनातन धर्म में दान और सेवा के वास्तविक महत्व पर प्रकाश डाला। पैसा दान देने से उत्तम है भूखे को भोजन कराना पत्रकारों से बातचीत करते हुए समाजसेवी शोभाराम निषाद ने कहा, “हमारे पूज्य बाबा और पिताजी ने हमें यही मार्ग दिखलाया है कि किसी को नगद पैसा दान देने से कहीं उत्तम है कि उसे आदरपूर्वक भोजन कराया जाए। भोजन और भंडारे के माध्यम से समाज की सेवा करने की यह परंपरा हमारे बाबा ने शुरू की थी, जिसे बाद में पिताजी ने आगे बढ़ाया और अब हम सब मिलकर इसे निभा रहे हैं। किसी भूखे का पेट भर जाने से बड़ा और पवित्र दान इस संसार में कोई दूसरा नहीं है। केवल पूरी-सब्जी ही नहीं, जीव-जंतुओं को दाना-पानी देना भी ‘भंडारा भंडारे की व्यापक परिभाषा समझाते हुए उन्होंने एक बेहद प्रेरक बात कही। श्री निषाद ने बताया कि भंडारे का मतलब केवल इंसानों को पूरी-सब्जी खिलाना ही नहीं है। अगर आप थोड़ा सा आटा और चीनी मिलाकर चींटियों को खिलाते हैं, तो वह भी एक भंडारा है। तपती गर्मी में बंदरों, पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं को दाना-पानी देना, यहाँ तक कि मुरझाते पेड़ों को पानी देना भी भंडारे और महादान की श्रेणी में आता है। मनुष्य का परम धर्म है कि वह अपनी नेक कमाई का दसवां अंश (दशांश) परोपकार और दान में लगाए, ताकि वह दान किसी के जीवन में सार्थक सिद्ध हो सके। शोभाराम निषाद, समाजसेवी
साल में होते हैं चार बड़े आयोजन, जेठ के हर मंगलवार को सेवा
शोभाराम निषाद ने बताया कि उनके परिवार द्वारा वर्ष में चार मुख्य और बड़े भंडारे आयोजित किए जाते हैं, जबकि छोटे-मोटे आयोजन तो हर महीने चलते रहते हैं। विशेषकर जेठ के महीने में पड़ने वाले सभी मंगलवारों को वे अयोध्या के अलग-अलग स्थानों पर जाकर भंडारा करते हैं। इस पुनीत कार्य में उनके बच्चे और सभी सहयोगी पूरी निष्ठा के साथ उनका साथ देते हैं। भंडारे में उमड़ा निषाद समाज और गणमान्य नागरिक
अयोध्या के इस भव्य भंडारे को सफल बनाने में निषाद समाज और स्थानीय गणमान्य लोगों ने बढ़-चढ़कर श्रमदान किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से
ओमकार निषाद, हरिओम निषाद, रामेंद्र निषाद, राजेंद्र निषाद, बाबू राम निषाद, कमलेश निषाद, राज निषाद, मनीष निषाद, अजय निषाद। सुनील कुमार (पूर्व प्रधान), पप्पू सिंह, डॉ. माता प्रसाद दुबे, अरविंद मौर्य, गुड्डू निषाद, अर्जुन निषाद, शिव कुमार निषाद, अनिल निषाद। माधव राज, सुरेश, गया प्रसाद निषाद, संदीप, पवन, प्रदीप, अमरजीत, रोहित समेत निषाद समाज के सैकड़ों श्रद्धालु और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
सभी ने मिलकर हनुमान जी के जयकारों के बीच भक्तों को प्रसाद वितरित किया और पुण्य लाभ कमाया।