महाशिवरात्रि पर मकस कहानिका अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन का सफल आयोजन
मकस कहानिका झारखण्ड अध्याय द्वारा 16 फरवरी 2026 को संध्या 6 बजे एक भव्य आभासी अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह आयोजन विभा तिवारी जी एवं सुधीर श्रीवास्तव जी की वैवाहिक वर्षगाँठ, नावेद रज़ा दुर्गवी जी के पुत्र के जन्मदिन तथा महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित किया गया।कार्यक्रम का वातावरण उत्सव, शुभकामनाओं और आध्यात्मिकता से परिपूर्ण रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जे. के. मिश्रा (दुबई ) की गरिमामयी उपस्थिति रही, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में सुधीर श्रीवास्तव (उ. प्र.)ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। सभा की अध्यक्षता एवं संयोजन श्याम कुंवर भारती (प्रधान संपादक) द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. प्रतिभा प्रकाश ने प्रभावी शैली में किया। शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ, जिसे खुशबू बरनवाल (रांची) ने प्रस्तुत कर वातावरण को ज्ञानमय बनाया। इसके पश्चात गणेश वंदना मीना अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत की गई। देवी गीत श्याम कुंवर भारती जी ने सुनाकर आध्यात्मिक भावों का संचार किया। स्वागत गीत एवं स्वागत भाषण कल्पना झा द्वारा प्रस्तुत किए गए। इसके पश्चात विशिष्ट अतिथि, मुख्य अतिथि और सभा अध्यक्ष ने उद्घोषण प्रस्तुत किया।
इस विशेष अवसर पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े साहित्यकारों और कवियों ने अपनी सशक्त रचनाओं से कार्यक्रम को यादगार बना दिया। प्रतिभागियों में डॉ. विजय कुमार गुप्ता “मुन्ना” (दुर्ग), सीमा मुकुंद अग्रवाल (रायपुर), माला सिंह (भिलाई), दिनदयाल साहु (भिलाई), सुरेश कुमार बंछोर (दुर्ग), सोनिया सोनी (भिलाई), नावेद रज़ा दुर्गावी (दुर्ग), मीना अग्रवाल (इंदौर), डॉ. प्रीतम कुमार झा (वैशाली, बिहार), मिताली वर्मा (भिलाई), कल्पना कुमारी (रांची), कल्पना झा (बोकारो), विद्या भूषण मिश्र (बेरमो), टी.सी. महतो (नावाडीह), टी.डी. नायक (बेरमो), शिवप्रसाद तथा डॉ. निराला पाठक (रांची) सहित अनेक साहित्यप्रेमियों ने सहभागिता कर अपनी प्रस्तुतियों, बधाइयों, शुभकामनाओं से भाव विभोर किया।
कवि सम्मेलन में प्रस्तुत कविताओं ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया तथा साहित्यिक एकता और रचनात्मकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समापन श्याम कुंवर द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
यह आयोजन साहित्यिक सौहार्द, सांस्कृतिक मूल्यों और रचनात्मक ऊर्जा का सुंदर संगम सिद्ध हुआ।