मेरी पीड़ा, मेरी आवाज़, मेरा आग्रह – शिवानी कुमारी     

मेरी पीड़ा, मेरी आवाज़, मेरा आग्रह – शिवानी कुमारी

 

मैं शिवानी कुमारी, पिता- श्री राधेश्याम प्रसाद चौरसिया माता- श्रीमती चंचला देवी, निवासी बिहार के जिला मुजफ्फरपुर के एक छोटे सै ग्राम-पकड़ी के छोटे से परिवार से आती हूँ l जहाँ पर अध्ययन की भी कोई खास सुविधा उपलब्ध नहीं था। विद्यालय भी दिन 8 कि.मी. दूर जाना-आना पड़ता था। यही नहीं रास्ते में बहुत सारी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता था। जैसे पागल कुत्ते, सुनसान रास्ते, कभी-कभी पैदल आना- जाना, अनजान लोग, प्रचंड धूप, बारिश, रास्ते में पीने के लिए पानी नहीं मिलना।और कक्षा की बात करूँ, तो छात्रों द्वारा प्रताड़ित करना कि दुबली पतली होने के कारण बाहर लोगों के द्वारा भी कि प्रताड़ित करना कि इतनी दूर पढ़ने जाएगी, आखिर इतना पढ़कर क्या करेगी? तरह-तरह की फिजूल बातें मेरे बारे में बोलते लोग। यदि महाविद्यालय के विषय में कहूँ! तो मेरे गाँव से वो भी 26 कि.मी दूरी पर अवस्थित दूर कॉलेज जाना-आना, तो कभी-कभार आटो से जाना-आना काफी पैसा खर्चीला होता था। पैसों के अभाव में 15 से 16 किलोमीटर पैदल चलना, कोचिंग करने के लिए भी 12 किलोमीटर आना-जाना। अध्ययन की उचित ब्यवस्था घर पर भी उपलब्ध नहीं थी।दुर्बल घर में रहा करती थी। छत के ऊपर बिना खिड़की दरवाजे कि एक छोटा सा कमरा जिसके ऊपर छाजन और झरोखा तक नहीं था, ऊपर से चूहों का बसेरा। चौकी, चारपाई की उपलब्धता के अभाव में भूमि पर एकांत शयन और अध्ययन किया करती थी।एक समय में भोजन करके भी बिना किसी सुख सुविधा के होते हुए भी पढ़ी-लिखी। जैसे – तैसे स्नातक पूरा करने के बाद अपनी एक स्वतन्त्र परिचय निर्माण करने के लिए चल पड़ी।वर्तमान में भी वही सतत प्रयास नियंत्रण के साथ जारी है।

आज भी बिना खिड़की दरवाजे वाले कमरे में ही पढ़ाई-लिखाई, भीषण ठंड के बावजूद भी भूमि पर शयन कर रही हूँ। फिर भी मेरा बिश्वास है कि मैं अपने परिवार, समाज, राष्ट्र के लिए कुछ अच्छा, शुभ कार्य निश्चित रूप से करुँगी।मुझे आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करने वाली सर्वप्रथम तो मेरी माँ ही है।जो मेरी जीवन की सबसे अच्छी शिक्षिका ही नहीं, मेरे जीने की सहारा भी हैं।जिनका आशीष, स्पर्श, आशीर्वाद मुझे विचलित होने नहीं दिया।मेरी नानी माँ जो मेरे जीवन की दूसरी सबसे अच्छी शिक्षिका रही हैं। जो एक लड़की को सशक्त होने के लिए हमेशा प्रोत्साहित करती रहती हैं। और भी लोग हैं, जिसमें एक तो मेरे कॉलेज की एक शिक्षिका भी हैं, जिनका मानना है कि गाँव से आई हुई बालिकाओं को यदि उचित शिक्षा व्यवस्था मिले, तो वो बालकों से अधिक आगे बढ़ सकती हैं। यह उनका बड़प्पन ही है कि उनकी सोच ऐसी है कि यदि मेरी छात्रा कुछ अच्छा करेगी, आगे बढेगी, तो वो मेरी स्वर्णिम सफलता होगी।

वर्तमान समय में मैं जितना भी सफल हो पाई हूँ, आगे बढ़ी हूँ, वो मेरी माँ के आशीर्वाद, विश्वास, आशा और प्रोत्साहन का परिणाम है। मैं NSS एवं राष्ट्रीय युवा प्रकल्प यानी NYP से भी जुड़ी हूँ। नियमित रुप से राष्ट्रीय युवा शिविरों में पशिक्षण ग्रहण करती आ रही हूँ। 02 अक्टूबर 2023 गाँधी जयन्ती से डा एस. एन. सुब्बाराव जी के तिरोधान दिवस 27 अक्टूबर 2023 में एक साइकिल रैली में प्रतिभाग कर सफलतापूर्वक एवं श्रृंखलात्मक रुप से पूर्ण भी कर चुकी हूँ। जिसका सारांश था महात्मा गाँधी एवं डा. एस. एन. सुब्बाराव जी के आदर्शों से अनुप्राणित होना,युवाओं के अन्तर्मन में मानविक शान्ति, अहिंसा, भाईचारा, स्नेह आदर, राष्ट्र-प्रेम, विश्व प्रेम, प्रकृति प्रेम का बीज बोना।वहीं यात्रा में मेरे आचार. विचार, व्यवहार को भी सभी ने खूब पसन्द किया।

हमारी साइकिल यात्रा पश्चिम चंपारण भीतहरवा आश्रम से आरम्भ होकर पटना तक 1600 कि. मी. की थी। इस यात्रा से हमने बिहार के 27 जिला को छुआ।उनमें से चंपारण, समस्तीपुर, भागलपुर, पटना. बेगूसराय, गया, नालन्दा, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया , मोतिहारी, मुंगेर आदि शामिल रहे। गुजरात शिविर, अरुणाचल युवा शिविर में भी मेरी उपस्थित रही। ओडिशा में कोणार्क से पुरी जगन्नाथधाम तक पदयात्रा भी मैंने किया।केवल NYP ही नहीं और भी कई सेवा में सम्मिलित होकर अपने दायित्व का निर्वहन कर रही हूँ।जैसे शिशुओं को मुफ्त शिक्षा प्रदान करना, योगा सिखाना, एक स्थान पर एक माह के लिए भी ऐसा एक अवसर प्राप्त हुआ था, जिसमें children actyvity पर ध्यान केन्द्रित करती हूँ। विशेष रुप से छोटे-छोटे शिशुओं की प्रतिभा के विकास के लिए में समर्पित प्रयास

कर रही हूँ। भाषण, गायन, नृत्य, अभिनय की अपनी क्षमता पर भरोसा करती हूँ। किसी भी कला का तत्काल प्रदर्शन करने का क्षमता भी मुझमें है, भारत के किसी भी राज्य के युवा साथियों के संग अनेक युवा शिविर इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। NYP के नरेन्द्र भाई जी मेरे अत्यन्त प्रिय हैं, जिनके निर्देशन में विशेष कार्यक्रम ‘भारत के सन्तान’ में भी समय-समय पर अभिनय भी करती आई हूँ, मेरे परिवार में मेरे अलावा मेरी दो बहन, एक भाई हैं।पिता एक कृषक हैं , जबकि मेरी माँ एक समर्पित गृहिणी की भूमिका निर्वाह कर रही हैं।

अपने कालेज जीवन में एक दुर्घटना का भी शिकार होना पड़ा था। साइकिल और मोबाइल भी चोरी हो गई थी, जिसे सहन करना आसान नहीं था, फिर भी सहन करना पड़ा।

सिक्किम के महामहिम राज्यपाल गंगाप्रसाद चौरासिया जी के द्वारा उनके आवास पर पुरस्कृत, सम्मानित भी हो चुकी हूँ।मेरा ऐसा कोई संगी साथी भी नहीं है, जिसे विश्वसनीय कह सकूँ। अर्थाभाव के कारण उचित ढंग से आगे नहीं बढ पा रही हूँ।

मेरी प्रार्थना है कि जनप्रतिनिधियों, सामाजिक, स्वैच्छिक संगठनों/संस्थानों, एनजीओ एवं राज्य/केंद्र शासन/प्रशासन द्वारा ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक संयुक्त अथवा स्वैच्छिक स्तर पर ऐसे तंत्र विकसित किए जाने चाहिए, जिससे ग्रामीण अंचल के बालक/बालिकाएं अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर अपने जीवन को बेहतर बना सकने के साथ देश/प्रदेश के विकास, उपलब्धियों में अपना योगदान देकर खुद को धन्य महसूस कर सकें।

 

शिवानी कुमारी

मुजफ्फरपुर, बिहार