*श्रीमद् भागवत कथा: जीवन के वैदिक सार का अमृत*
*त्रिभुवन दास जी महाराज ने कहा – श्रीमद् भागवत कथा भगवान के मुखारबिंद से निकली ऐसी ज्ञानधारा है जिसके 18 हजार श्लोकों में जन्म से मोक्ष का संपूर्ण रहस्य समाहित है*
जितेन्द्र पाठक
संतकबीरनगर – गुरुवार को भिटहा स्थित “चतुर्वेदी विला” में चल रही नौ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचक त्रिभुवन दास जी महाराज ने श्रोताओं को जीवन के वैदिक सार से रूबरू कराया। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत पुराण श्रद्धा, संस्कार और समर्पण का मूल स्तंभ है। इसके हर शब्द में सत्य ही समाहित है।
*श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन की कथा का शुभारंभ*
कथा की मुख्य यजमान “चतुर्वेदी विला” की मुखिया चंद्रावती देवी के नेतृत्व में सूर्या ग्रुप के चेयरमैन डा उदय प्रताप चतुर्वेदी, एसआर के एमडी राकेश चतुर्वेदी, रत्नेश चतुर्वेदी ने कथा व्यास का तिलक और बांके बिहारी की आरती करके कथा का शुभारंभ कराया।
*श्रीमद् भागवत कथा के महत्व को बताया*
कथा वाचक त्रिभुवन दास जी महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा भगवान की वाणी है। इसमें सभी वेदों के सार के साथ ही गायत्री मंत्र की पौराणिकता भी समाहित है। उन्होंने कहा कि जिस “धीमहि” शब्द का उल्लेख प्रभु की बाणी से हुआ है उसी अनमोल शब्द का प्रयोग गायत्री मंत्र में भी उल्लेखित है।
इस अवसर पर गोमती चतुर्वेदी, सूर्या ग्रुप की एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर सविता चतुर्वेदी, एसआर की एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर शिखा चतुर्वेदी, जिला पंचायत अध्यक्ष बलिराम यादव, मनोज कुमार पांडेय, अभयानंद सिंह, दिग्विजय यादव, बृजेश चौधरी, आनंद ओझा सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।