अयोध्या। रामनगरी में काशी–तमिल संगमम् का आगाज़ गुरुवार को पारंपरिक गरिमा और सांस्कृतिक उत्साह के साथ हुआ। काशी और तमिलनाडु से आए अतिथि 4 दिसंबर की पहली खेप में अयोध्या पहुंचे। आगमन के बाद अयोध्या बस स्टैंड के निकट स्थित श्रीराम ऑडिटोरियम में उनका स्वागत–सम्मान किया गया। मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और उत्सवमय बना दिया।
कार्यक्रम को सफल और ऐतिहासिक बनाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय दिखा। अयोध्या के डीएम निखिल टीकाराम पंडित ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण कर अधिकारियों को सूक्ष्म व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रशासनिक निगरानी में एसडीएम अरविंद कुमार, एडीएम, आईआरसीटीसी के नवनीत गोयल, एसडीएम अशोक सैनी तथा एसपी सिटी चक्रमणि त्रिपाठी पूरे आयोजन के दौरान व्यवस्था और सुरक्षा में पैनी नजर रखी साथ ही कार्यक्रम में सहयोग कर रहे स्थानीय अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भी इसे सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
श्रीराम ऑडिटोरियम के सीईओ सुशील चतुर्वेदी ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धुरी के रूप में उभरकर सामने आई है। देश के विभिन्न प्रांतों से लोगों का निरंतर आगमन इस एकता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि काशी–तमिल संगमम् से अयोध्या, काशी और तमिल समुदायों के बीच सांस्कृतिक समन्वय और गहरा होगा। चतुर्वेदी ने बताया कि आगंतुकों के स्वागत, आवास एवं सभी सुविधाओं को लेकर प्रशासन और आयोजन समिति सतर्क और तत्पर है। उनके अनुसार यह आयोजन अयोध्या के लिए सौभाग्य का विषय है, क्योंकि इससे देश की विविध सांस्कृतिक धाराएँ रामनगरी में एक साथ प्रवाहित हो रही हैं।
अयोध्या में आयोजित यह संगम न केवल सांस्कृतिक आदान–प्रदान का अवसर है, बल्कि तीन प्राचीन सांस्कृतिक ध्रुवों—अयोध्या, काशी और तमिल—के ऐतिहासिक मिलन का क्षण भी बन गया है।