महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या, 28 नवंबर 2025 रामायण मेला समिति, अयोध्या द्वारा आयोजित 44वें रामायण मेले का द्वितीय दिवस अत्यंत ही भव्य और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ हरे राम दास की रामलीला के साथ हुआ, जिसमें ‘राम कलेवा’ का मनमोहक मंचन किया गया, जिसके बाद प्रवचन सत्र का आयोजन हुआ। सांस्कृतिक संध्या में कला और भक्ति का संगम द्वितीय दिवस की सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ डॉ. सुनीता शास्त्री ने दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर समिति के उपाध्यक्ष महंत अवधेश दास शास्त्री जी ने उन्हें पुष्प अर्पित कर आभार व्यक्त किया। सांस्कृतिक संध्या में कला और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ और रामायण मेला समिति के बीच हुए एमओयू के अंतर्गत, विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक राम मोहन महाराज और एल्युमिनी रेनू शर्मा द्वारा निर्देशित नृत्य नाटिका में श्री राम विवाह का मंचन कथक नृत्य शैली में किया गया, जिसने दर्शकों का मन मोह लिया।इसके अतिरिक्त, डॉ. कल्पना एस बर्मन ने राम के चरित्र पर आधारित लोक गायन प्रस्तुत किया, जबकि अग्निहोत्री बंधुओं ने मधुर राम भजन से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। माता प्रसाद ने अवधी लोक कला पर आधारित फरवाही नृत्य का प्रदर्शन किया, और प्रयागराज से आईं सोनाली चक्रवर्ती ने राम दरबार नृत्य नाटिका की शानदार प्रस्तुति दी। 44 वर्षों से चली आ रही परंपरा
रामायण मेला समिति के संयोजक आशीष मिश्रा ने बताया कि यह मेला पिछले 43 वर्षों से लगातार आयोजित किया जा रहा है और इस वर्ष 44वां आयोजन है। उन्होंने जोर दिया कि मेले में रामायण के विभिन्न प्रसंगों का मंचन और विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।मुख्य अतिथि डॉ. सुनीता शास्त्री ने मेले के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रामायण मेला एक ऐसा आयोजन है जो हमें भगवान राम की शिक्षाओं को याद दिलाता है और हमें जीवन के सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने इस मेले को अयोध्या की संस्कृति और धार्मिक भावना का प्रतीक बताया।