वैदिक साधन आश्रम तपोवन, देहरादून के सेवाभावी मैनेजर श्री विजेश गर्ग

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“वैदिक साधन आश्रम तपोवन, देहरादून के सेवाभावी मैनेजर श्री विजेश गर्ग”
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वैदिक साधन आश्रम तपोवन, देहरादून आर्यसमाज की राष्ट्रीय स्तर की एक प्रसिद्ध संस्था है। अतीत में देश भर से वैदिक परम्पराओं एवं वैदिक ज्ञान पर आधारित साधना द्वारा अपना आत्म कल्याण करने सहित ईश्वर को जानने व उसे उपासना से प्राप्त करने के लिए वैदिक धर्म प्रेमी बन्धु यहां आते रहे हैं और अनेकों ने यहां आत्मकल्याण व आत्मा की उन्नति के लक्ष्य को प्राप्त किया है। वैदिक साधन आश्रम तथा इसके अन्तर्गत संचालित तपोभूमि जो आश्रम से तीन किलोमीटर दूर पहाड़ियों पर ऐसे स्थान पर स्थित है जो ऊंचे वृक्षों से घिरा हुआ है। यह स्थान साधना व इसके लक्ष्य आत्मोन्नति वा ईश्वर के साक्षात्कार को प्राप्त कराने के लिए उपयुक्त है। अतीत में यहां पर स्वामी योगेश्वरानन्द सरस्वती जी, उनके शिष्य देश में विख्यात महात्मा आनन्द स्वामी जी सहित महात्मा प्रभु आश्रित तथा महात्मा दयानन्द वानप्रस्थ जी आदि अनेक साधकों की तपःस्थली रहा है। इस आश्रम की स्थापना देहरादून में अमृतसर के बावा गुरमुख सिंह जी ने महात्मा आनन्द स्वामी जी की प्रेरणा से दिनांक 15 दिसम्बर, 1948 को की थी। इस आश्रम का स्वर्णिम अतीत है। हम भी इस आश्रम से विगत 50 वर्षों से अधिक समय से जुड़े हुए हैं। उच्च कोटि के वैदिक विद्वान, संन्यासी व महात्मा यथा स्वामी आनन्द स्वामी जी, स्वामी विद्यानन्द विदेह, योग के उच्च श्रेणी के सिद्ध महात्मा स्वामी सत्यपति जी, रोजड़ आदि यहां आते रहे हैं। हमें भी उनके साक्षात् दर्शन होने के साथ उनके उपदेशों को सुनने का सौभाग्य प्राप्त रहा है। यह आश्रम सुगमतापूर्वक चलता आ रहा है तो इसमें इस आश्रम के अधिकारियों, व्यवस्थापकों व कर्मचारियों के परिश्रम का योगदान होना निर्विवाद है। आज हम इस लेख में आश्रम को दिसम्बर, 2008 से मैनेजर के रूप में अपनी सेवायें दे रहे श्री विजेश गर्ग जी का संक्षिप्त परिचय दे रहे हैं।

वैदिक साधन आश्रम तपोवन के मैनेजर श्री विजेश गर्ग जी का जन्म उत्तर प्रदेश के अन्तर्गत जिला मुजफ्फरनगर के एक ग्राम नावला में दिनांक 12 नवम्बर 1948 को हुआ था। उनके पिता का नाम लाला आनन्द प्रकाश जी तथा माताजी का नाम श्रीमती सितारोदेवी था। आपकी शिक्षा कक्षा 8 तक ग्राम नावला में हुई तथा इसके आगे कक्षा 9 व 10 की शिक्षा मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर कस्बे में संचालित एक इण्टर कालेज में हुई। कक्षा 11 के बाद इन्होंने देहरादून के यूसीएनआइ, इण्टर कालेज एवं एसजीआरआर महाविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की। बीएससी में प्रवेश लेकर आपने एक वर्ष तक अध्ययन किया। सन् 1968 में आपकी नियुक्ति देहरादून के निकट ऋषिकेश में केन्द्र सरकार की रसायनिक दवाओं का निर्माण करने वाली देश की एक प्रसिद्ध फैक्ट्ररी आईडीपीएल-इण्डियन ड्रग्स एवं फार्मास्युटिकल लिमिटेड में हो गई थी। यहां आप शिफटों में अंग्रेजी दवाओं के निर्माण में अपना योगदान देते थे।

आपका विवाह श्रीमती गीता गर्ग जी से देहरादून में हुआ। वधु पक्ष के सभी सम्बन्धी देहरादून में ही रहते हैं। आपके दो पुत्र एक एक पुत्री हैं। एक पुत्र एवं पुत्री विवाहित हैं। श्री विजेश गर्ग जी ने आईडीपीएल दवा फैक्ट्ररी में 20 वर्षों तक शिफ्टों में काम किया। इसके बाद आपको कार्यालय में स्थानान्तरित कर दिया गया जहां आपने दवाओं से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार के कार्य किये। आप दवाओं से सम्बन्धित प्रशासनिक प्रकृति के कार्य किया करते थे। जो ओषधियां बनती थी उनका अभिलेख रखते थे तथा दवाओं के निर्माण से सम्बन्धित इतर सभी कार्यों को सम्पादित करते थे। लगभग 55 वर्ष की अवस्था में दिनांक 31-1-2003 को लगभग 35 वर्ष आईडीपीएल में सेवा करने के बाद आपने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली और उसके दो वर्ष बाद सन् 2005 में देहरादून आ गये। यहां आपने सुभाषनगर में अपना गृह निर्माण कराया और वर्तमान में अपने परिवार जनों के साथ वहीं पर रहते हैं।

सन् 2008 में आप वैदिक साधन आश्रम तपोवन, देहरादून के सम्पर्क में आये। आश्रम में आपके एक पुत्र श्री नितिन गर्ग जो लेखाकार्यों में निपुण थे, अपनी सेवायें दिया करते थे। उन दिनों आश्रम को एक मैनेजर का कार्य करने के लिये उपयुक्त अनुभवी व्यक्ति की आवश्यकता थी। आश्रम के मंत्री जी ने आपके पुत्र को कोई मैनेजर पद कार्य करने के लिये योग्य एवं दक्ष व्यक्ति बताने को कहा। नितिन गर्ग जी ने अपने पिता का नाम प्रस्तावित किया। इस प्रकार आप आश्रम के सम्पर्क में आये और सन् 2008 से तपोवन में मैनेजर के दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वाह कर रहे हैं। विगत 17 वर्षों से आप आश्रम को अपनी सेवायें दे रहे हैं। दो बार आपने कुछ अवधि के लिये से अवकाश भी लिया परन्तु आपके मैनेजर पद के कार्य, ज्ञान व उसके अनुभव के कारण आप आश्रम के लिये अपरिहार्य बने हुए हैं। आप का निवास आश्रम से 16 किमी. की दूरी पर सुभाषनगर में है जहां से आप रविवारीय अवकाश के अतिरिक्त सभी कार्य दिवसों में आश्रम में आते हैं।

श्री विजेश गर्ग जी का अपनी 77 वर्ष की आयु में अपने दीर्घकालीन अनुभवों एवं सेवाओं से आश्रम को योगदान देना प्रशंसनीय है। आपके कार्यकाल में आश्रम ने भौतिक दृष्टि से भी उल्लेखनीय प्रगति की है। आश्रम में एक अस्पताल बना है। इस अस्पताल को बनने में कई वर्ष लगे हैं। यहां एक तपोवन विद्या निकेतन माध्यमिक स्कूल जो नर्सरी से कक्षा आठ तक है, चल रहा है। इस विद्यालय का अपना भव्य भवन भी है। आश्रम से तीन किमी. दूर पहाड़ियों व वनों से आच्छादित तपोभूमि पर भी निर्माण के अनेक कार्य हुए हैं। वहां एक भव्य एवं विशाल यज्ञशाला है जहां स्वामी चित्तेश्वरानन्द सरस्वती जी वर्ष में एक-दो बार वेद पारायण यज्ञ कराते हैं। वहां साधकों के निवास के लिये 10 कुटियायें भी बनी हैं। एक बड़ा हाल भी है। कई एकड़ भमि में यह आश्रम पर तपोभूमि फैला हुई है। यहां वर्तमान में विद्युत एवं जल की भी सुविधायें हैं जो दो-तीन दशक पहले नहीं थीं। मोबाइल नैटवर्क भी तपोभूमि में आता हैं। इसकी व्यवस्था व कार्यों में भी आपका कुछ योगदान रहा है।

अपने सभी कार्यों को करते हुए श्री विजेश गर्ग जी को हमने सदैव व्यस्त एवं प्रसन्न मुद्रा में देखा है। हम आशा करते हैं कि आने वाले समय में भी उनकी सेवायें आश्रम को मिलती रहेंगी। वह स्वस्थ रहेंगे और आश्रम में आते रहेंगे। हम उनके एवं परिवारजनों के स्वस्थ एवं मंगलमय जीवन की कामना करते हैं। आश्रम आने वाले समय में आशातीत उन्नति करे यह भी हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं। ओ३म् शम्।

-मनमोहन कुमार आर्य