भाव से तुलसी  का समर्पण भी प्रभु को प्रिय – अतुल जी महराज

 लालगंज , प्रतापगढ़।
 नौढ़िया में हो रही श्रीमद्भागवत कथा में प्रख्यात कथा वाचक अतुलजी महराज ने कहा कि भाव से तुलसीदल भी भगवान को प्रिय है। उन्होने कहा कि अहंकार से वसीभूत होकर चौदह भुवन भीब्यास जी ने  भगवान को स्वीकार्य नहीं हुआ। कथा  ब्यास जी ने कहा कि  भगवान बड़ें करुणामयी हैं, वह भक्ति की निर्मलता में सुखों व दुखो की पहरेदारी भी किया करते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान का ध्यान सदैव अभिमान रहित करना चाहिंये। अतुल जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण जी का बालस्वरूप धर्म की विजय का मोहक संदेश है। कथा में भगवान द्वारिकाधीश के जन्मोत्सव पर जय कन्हैयालाल की हाथी घोड़ां पालकी भजन पर श्रद्वालुओं का भाव नृत्य मनोहारी दिखा। संयोजक पं माताफेर तिवारी व पूर्व प्रधन आशीष तिवारी ने भगवान की पालकी पर भक्तों के साथ पुष्पवर्षा की। आरती का दृश्य भी मनोरम दिखा। इस मौके पर डॉ विनय द्विवेदी, जिपंस दिलीप पांण्डेय, रुरल बार के अध्यक्षे ज्ञान प्रकाश शुक्ल, हिमांचल तिवारी, श्रीनारायां तिवारी, निंतिन मिश्र, शास्त्री सौरभ , दिनेश सिंह,  आदि रहे।