प्रयागराज।(आरएनएस ) शंकराचार्य गोवर्धन मठ पुरी ओड़ीसा स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि गौ संरक्षण हेतु हर प्रदेश के जिलों में गोचर भूमि आरक्षित होनी चाहिए जहां गौ वंशों के विचरण, उनके भोजन और जल का प्रबंधन हो। महाकुंभ क्षेत्र के सेक्टर 19 संगम लोअर मार्ग स्थित अपने शिविर में श्रद्धालुओं को संबंधित करते एवं धर्म आध्यात्म राष्ट्र से संबंधित प्रश्नों के उत्तर में उक्त बातें कही।
गौ संरक्षण से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि गौ संरक्षण के लिए देश के हर राज्य के प्रत्येक जिले में केंद्र बनाकर एक भूमि का एक भाग ऐसा आरक्षित होना चाहिए जहां गौ माता विचरण कर सकें। उनके चारा और जल पीने की व्यवस्था हो उस आरक्षित भूमि पर। गौ पालकों को भी चाहिए कि वे गौ वंशों को छुट्टा छोड़ने से बचें। दूध न देने पर पशुपालक गौ वंशों को भटकने के लिए छोड़ देते हैं ये उचित नहीं है। महाकुंभ के माहात्म्य के विषय में बताते हुए शंकराचार्य ने कहा कि यम नियम से कल्पवास और संगम स्नान करने से लौकिक पारलौकिक मार्ग प्रशस्त होता है। सनातन परंपरा की विद्या और कला को दर्शन विज्ञान और व्यवहार के दृष्टिकोण से समझाने पर सनातन सिद्धांत की प्रामाणिकता सिद्ध होती है। सनातन बोर्ड गठन के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि चार शंकराचार्य प्रामाणिक होते हैं। यदि शंकराचार्य अपने दायित्व का निर्वाह करें और मठ मंदिर के लोग शंकराचार्य से परामर्श लें तो अतिरिक्त किसी बोर्ड की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म को धर्म न मानने वाले खतरे में हैं। जो शंकराचार्य और जगत गुरु नहीं हैं वे भी शंकराचार्य और जगत गुरु का बोर्ड लगाकर घूम रहे हैं। जिस तरह भगवान श्री कृष्ण के काल में नकली कृष्ण घूम रहे थे उसी तरह जो शंकराचार्य और जगत गुरु नहीं हैं वे भी शंकराचार्य और जगत गुरु का बोर्ड लगाकर घूम रहे हैं।