🏵️🏵️ ओ३म् 🏵️🏵️
*वाटसप गुरुकुल कक्षा-१०*
अभी तक हमने ब्रह्माण्ड के तीन तत्वों *शरीर,मन व बुद्धि* के बारे में जाना कि ये तीनों तत्व स्वयं पाप नहीं करते।ये तो जड़ पदार्थ हैं और जीवात्मा के साधन मात्र हैं।जब ये पाप करते ही नहीं तो इनको पाप लगता भी नहीं क्योंकि जो *कर्म का कर्त्ता होता है वही भोक्ता भी होता है।
✍️ ✍️ जिज्ञासा ✍️✍️
*तो फिर कर्ता भोक्ता कौन है?*
✍️✍️ समाधान ✍️✍️
इसी का उत्तर जानने के लिए हम *चौथे तत्व* की चर्चा प्रारंभ करते हैं।गतांक से आगे………………….
*ब्रह्माण्ड का चौथा तत्व आत्मा!!!!*
प्यारे सज्जनो! यह आत्मा शरीर,अवस्था,गुण,मन,बुद्धि व पंचकोषों से परे *एक चेतन सत्ता* है।शरीर,मन,व बुद्धि इस आत्मा के *ज्ञान-कर्म-उपासना व विज्ञान* को प्राप्त करने के साधन हैं।
*छोटी व मोटी बात*
अब हम आपको आत्मा के बारे में कुछ *छोटी-मोटी,अनिवार्य व सैद्धान्तिक* बात बताने जा रहे हैं।यदि आपने इन बातों को *समझा-जाना व अनुभव* नहीं किया तो आप कभी भी *धर्म-अधर्म,पाप-पुण्य,सत्य व असत्य* के अंतर को नहीं समझ पायेंगे और धर्म के नाम पर जो भी करेंगे वो दूसरों की नकल ही समझा जायेगा।आज का *पौराणिक हिंदू पूजा-पाठ,धर्म,दान-पुण्य,तीर्थ-स्नान* जो भी करता हैसब देखा-देखी करता है।आप उनसे पूछो ये सब क्यों करते हो? उसका घुमा-फिराके दो ही उत्तर होते हैं।
*(१)* जो सब करते हैं वही मैं करता हूं?
*(२)* क्या सब लोग गलत ही कर रहे हैं।लाखों लोग जिस काम को कर रहे हैं वो सब गलत ही है?
ऐसा उत्तर देकर वह संतुष्ट हो जाता है।उनको ही प्रमाण मानकर गलत कामों को और भी तन-मन-धन से करता है और एक झूठा संतोष मन में पैंदा कर लेता है कि मैं ठीक हूं *क्योंकि मेरे साथ करोड़ों लोग हैं।पैंसे वाले हैं।नेता हैं।महात्मा हैं।* जो उनका होगा वो मेरा भी होगा। इस दोष से बचने के लिए आपको *आत्मा की इन छोटी-मोटी* बातों को जानना बहुत जरूरी है ताकि आप अपने सत्य ज्ञान के मालिक बन सकें।ध्यान से पढ़ें!!!!
*[१]* आत्मा सूक्ष्म व निराकार है।
*[२]* आत्मा अणु है।
*[३]* आत्मा एक देशी है।
*[३]* आत्मा कभी ब्रह्म नहीं होता!
*[४]* आत्मा का अवतार होता है।अर्थात् आत्मा शरीर धारण करती हैऔर छोड़ती है।
*[५]* आत्मा का पुनर्जन्म होता है।
*[६]* आत्मा की कभी हत्या यानि आत्महत्या नहीं होती।
*[७]* आत्मा का शुभ/अशुभ कर्मों से उत्थान-पतन होता है।
*[८]* आत्मा मानव शरीर में भोग-विलास करने नहीं मोक्ष के लिए आई है।
*[९]* आत्मा शरीर में अपने आप नहीं आता इसे कर्मानुसार परमात्मा शरीरों में भेजता है।
*[१०]* परमात्मा की ही आज्ञा मानने से आत्मा की मुक्ति संभव है।
ये आत्मा के बारे में *छोटी व मोटी बातें* आपके समझ में आ ग ई तो फिर आपके समझ मे यह भी आ जायेगा कि *पाप जल- गंगा में नहीं ज्ञान-गंगा* में स्नान करने से नष्ट होंगे! आज की *ज्ञानकुंभ* में इतना ही स्नान होगा।शेष स्नान कल होगा………………..
आचार्य सुरेश जोशी
*वाटसप गुरुकुल महाविद्यालय*आर्यावर्त साधना सदन दशहराबाग बाराबंकी उत्तर प्रदेश।