रात अँधेरी बीतेगी ही तय है मित्रो

मित्रो __ _ _ _ _🌞

रात अँधेरी बीतेगी ही तय है मित्रो ।

होगा प्रात न इसमें कुछ संशय है मित्रो ।।

★ ★ ★ ★ ★

निकले ही निकलेगा सूरज बदली से ।

धूप खिलेगी राय न इसमें द्वय है मित्रो ।

■ ■ ■ ■ ■

लोहा लेता रहता है संघर्षों से जो ।

होती उसको प्राप्त अवश्य विजय है मित्रो ।।

◆ ◆ ◆ ◆ ◆

आँख खोलकर चलता है जो साथ समय के ।

देता उसका साथ सदैव समय है मित्रो ।।

● ● ● ● ●

कर पाएगा उसका बाल न बाँका कोई ।

लोभ न जिसके निकट कि जो निर्भय है मित्रो ।।

★ ★ ★ ★ ★

विचलित होता जो न देख संकट के बादल ।

होता सफल कि जिसका दृढ़ निश्चय है मित्रो ।।

■ ■ ■ ■ ■

उसके सम्मुख सभी सम्पदाएँ हैं बौनी ।

जिसको प्राप्त सुविद्या और विनय है मित्रो ।।

◆ ◆ ◆ ◆ ◆

जीवन उसका धन्य कि जो परहित में जीत ।

उसके लिये मरण भी मंगल मय है मित्रो ।।

● ● ● ● ●

जो स्वदेश की रक्षा में निःशेष हुआ है ।

उसका नाम अमर है यश अक्षय है मित्रो ।।

★ ★ ★ ★ ★

मात्र न वेश विशेष साधु का सच्चा परिचय ।

साधु वही है जिसका सरल ह्रदय है मित्रो ।।

■ ■ ■ ■ ■

हर्ज नहीं गिर गये कभी गर चलते चलते ।

गिर कर नहीं सँभलते यह विस्मय है मित्रो ।।

◆ ◆ ◆ ◆ ◆

प्रेम देवता से न देवता ऊँचा कोई ।

मन से बड़ा न कोई देवालय है मित्रो ।।

🎍बालसोम गौतम-बस्ती(उप्र)🎍