राष्ट्र और उसकी रक्षा -आचार्य सुरेश जोशी

🕉️ *ओ३म्* 🕉️
🌻 राष्ट्र और उसकी रक्षा 🌻
आर्य समाज मंदिर नबाबगंज में चल रहे वार्षिकोत्सव के तृतीय दिवस के पावन अवसर पर तीन सत्रों में कार्यक्रम सम्पन्न किये गये।
🏵️ *प्रथम सत्र देवयज्ञ*🏵️
यज्ञ संसार का सर्वश्रेष्ठ कर्म है।यज्ञ में चार बातें होती हैं।
*[१]* विद्वानों का सत्कार।
*[२]* शिल्प अर्थात् रसायन विज्ञान द्वारा पदार्थों का सदुपयोग।
*[३*] विद्यादि शुभ गुणों का दान।
*[४]* अग्निहोत्र जिनसे जल, वायु,वृष्टि,औषधि की पवित्रता करके सब जीवों को सुख पहुंचता है।
इन चारों बातों का ध्यान रखते हुए यज्ञ द्वारा पर्यावरण शुद्ध किया गया।
*सत्र दो राष्ट्र एवं रक्षा*
जहां यज्ञ आर्य समाज मंदिर मे समायोजित किया गया।वहीं राष्ट्र रक्षा सम्मेलन *दयानन्द एंग्लो वैदिक इंटर कालेज नबाबगंज* के भब्य प्रांगण में मनाया गया।इस अवसर पर बालक/बालिकाओं के अंदर देश भक्ति के भाव प्रेरित किए गये।एक राष्ट्र भक्त के जीवन में पांच अनिवार्य विशेषताएं होनी चाहिए।
*[१]* प्रत्येक राष्ट्र भक्त युवक – युवतियों के अंदर माता-पिता-आचार्य व धर्मात्माओं में पूज्य बुद्धि हो!
*[२]* प्रत्येक राष्ट्र भक्त के भीतर शारीरिक,आत्मिक व सामाजिक उन्नति में दक्षता होनी चाहिए।
*[३]* प्रत्येक राष्ट्र भक्त में प्राणि मात्र में अहिंसा व रक्षा का भाव हो।
*[४]* राष्ट्र भक्त में मित्र व शत्रु के पहचान की दक्षता हो !
*तृतीय सत्र आर्य निर्माण सम्मेलन।*
एक समय ऐसा था जब संपूर्ण विश्व में आर्य ही आर्य थे। महाभारत काल से कुछ वर्ष पहले कुछ आर्यों का आचरण पतित होने से आर्य ही अनार्य पुन: मत-मतांतरों में विभक्त होकर पारसी,यहूदी,ईसाई,मुसलमान,बौद्ध,ईसाई, जैन,सिक्ख,हिंदू में मानवता बट ग ई। * *आर्य का अर्थ होता है श्रेष्ठ,सदाचारी,धर्मात्मा,सरल,सौम्य,परोपकारी,जीतेन्द्रिय,वेदादि शास्त्रों का विद्वान।*
जब तक मानव जातिवाद।वर्गवाद।छूआ-छूत।सम्प्रदाय वाद ।ऊंच-नीच।अपना-पराये की भावनाओं से ग्रसित होकर कार्य करता है वो *आर्य* नहीं कहलाता।
एक समय ऐंसा था जब कि *अमेरिका का राष्ट्रपति बभ्रूवाहन,चीन का राष्ट्रपति भगदत्त,ईरान का राष्ट्रपति शल्य, यूरोप का राष्ट्रपति विडालाक्ष* आर्यावर्त्त के तात्कालीन युवा राष्ट्रपति *महात्मा युधिष्ठिर* को अपना नेता स्वीकारने के लिए आर्यावर्त देश में पहुंचे।इन राष्ट्राध्यक्षों का अनुमोदन प्राप्त कर *आर्यावर्त को चक्रवर्ती राष्ट्र* घोषित किया गया है।
इस चक्रवर्ती राष्ट्र की आधारशिला थी *सत्य -सनातन वैदिक धर्म ,योग,संस्कार,पुरुषार्थ,न्याय एवं निराकार ईश्वर की उपासना*
आज भी यदि हम इस पर आचरण करें तो पुन: खोया हुआ चक्रवर्ती सम्राट की पदवी हम प्राप्त कर सकते हैं।इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर चार प्रकार की आचार संहिता अनिवार्य कर देनी चाहिए।
*(१)* पाठशाला *(२)* यज्ञशाला *(३*) व्यायामशाला *(४)* गौ-शाला।
🌹 *दिब्य -प्रेरणा* 🌹
यह पुण्य भूमि प्रसिद्ध है,इसके निवासी आर्य हैं।
विद्या कला कौशल्य के जो प्रथम आचार्य हैं।।
संतान यद्पि आज इनकी,है अधोगति में पड़ी।
पर चिह्न उनकी सभ्यता के आज भी कुछ हैं खड़े।।
🪷 आचार्य सुरेश 🪷
*वैदिक प्रवक्ता*
आर्यावर्त साधना सदन
पटेल नगर दशहरा बाग।बाराबंकी उ० प्र०
🍁 *७९८५४१४६३६* 🍁