दीपोत्स‌व भी फिर हर्षायेगा

“दीपोत्स‌व भी तब हर्षायेगा”
दीप जला कर अक्सर हमने,
मान‌ लिया जग जीता है।
पर वहां उजाला पहुंची क्या ?
जहां तन रीता मन रीता है।
अक्सर हमने जोर-शोर से,
दीप जलाये खुशी मनाये।
पर कुछ जन तो ऐसे भी हैं,
जिनके चूल्हे जल नहीं पाये।
नूतन वस्तु वस्त्र नूतन ले,
हम तरह-२ के दीप जलाये।
पर कुछ जन तो ऐसे भी हैं,
जिनके तन भी ढक नहीं पाये।
दीप मालिका तभी सार्थक,
जब जन-२ का मन हर्षाये।
इसलिए उठो संकल्प करो,
दीपोत्सव सबके साथ मनायें।
तभी दीप घर-घर लहकेगा,
हर आंगन व चेहरा दमकेगा।
हर मन से तम मिट जायेगा,
दीपोत्सव भी तब हर्षायेगा।
दीपोत्सव भी तब हर्षायेगा,
दीपोत्षव भी तब हर्षायेगा।।
आप सभी लोगों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं
बाल कृष्ण मिश्र कृष्ण
३१.१०.२०२४
जयपुर राजस्थान