/ नहीं रहे मशहूर ओ मारूफ शायर फहमी बदायुनी / इश्क़ वफ़ा और प्यार मुहब्बत सब कुछ फहमी तुम्हारे नाम, सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,,,,


अनुराग लक्ष्य, 22 अक्टूबर
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
उत्तर प्रदेश का त्वारीखी शहर बदायूं का एक अदबी आफताब वक्त की खाक में सुपुर्द ए खाक हो गया। जिसका रंज ओ गम उन सभी अहबाब को है जो फहमी बदायुनी को एक कोहना मशक शायर की शक्ल में जानते और पहचानते थे। सारी जिंदगी अदब की खिदमत में अपनी ज़िंदगी को सर्फ कर देने वाले फहीम बदायूंनी हमेशा ज़िंदा रहेंगे, क्योंकि उनके जैसा अदब का सितारा आसमान में कभी कभी नमूदार होता है। तभी उनका यह शेर आज उनके जाने का मातम मना रहा है, उनका यह शेर सदियों ज़िंदा रहेगा, जो खुद उनकी मौत की अक्कासी कर रहा है ।
,,, मौत मांगी थी रात भर मैने,
तब कहीं थोड़ी नींद आई थी,,,
आज वोह इतिहास बन गए हैं, त्वारीख़ बन गए हैं लेकिन उनके कलाम हमारे दिलों में ज़िंदा रहेंगे।
पेश है आज उनकी एक खास ग़ज़ल के कुछ अशआर,
1/ ज़रा मोहतात होना चाहिए था,
बग़ैर अश्कों के रोना चाहिए था ।
2/ अब उनको याद करके रो रहे हैं,
बिछड़ते वक्त रोना चाहिए था ।
3/ मिरी वादा खिलाफी पर वोह चुप है,
उसे नाराज़ होना चाहिए था ।
4/ चला आता यकीनन ख़्वाब में वोह
हमें कल रात सोना चाहिए था ।
5/ सूई धागा मुहब्बत ने दिया था,
तो कुछ सीना पिरोना चाहिए था।
इस अवसर पर अनुराग लक्ष्य के मुम्बई कार्यालय में एक शोक सभा आयोजित की गई। जिसमें अदब से जुड़े अदीब और शोअरा हज़रात ने फहमी बदायुनी को उनके अदबी क्षेत्र में किए गए विशेष योगदान पर चर्चा करते हुए उन्हें हिंदुस्तानी शायरी का एक चमकता सितारा बताया। इस अवसर पर अनुराग लक्ष्य मुंबई के संवाददाता सलीम बस्तवी अज़ीज़ी ने कहा कि फहमी बदायुनी साहब की मौत एक ऐसा ग़म है जिसे भूलना नामुमकिन है। रहती दुनिया तक अदब में उनका नाम मानिंद ए आफताब रोशन रहेगा। कुछ इस तरह, कि
,, इश्क़ वफ़ा और प्यार मुहब्बत सब कुछ फहमी तुम्हारे नाम,
सुबह की लाली शाम की रंगत सब कुछ फहमी तुम्हारे नाम।
ज़िंदा रहेगा नाम तुम्हारा जब तक चांद सितारे हैं,
इल्म ओ अदब की इक इक दौलत सब कुछ फहमी तुम्हारे नाम।।
,,,,,,, सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,,,,,