अरुंधति हाल में संत सम्मान एवं रामलाल रक्षा यंत्र विमोचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। श्रीरामलला अयाेध्या जी सेवा समिति के तत्वाधान में शनिवार को टेढ़ीबाजार चाैराहा स्थित अरूंधति हाल में संत सम्मान एवं रामलला रक्षा यंत्र विमाेचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के ताैर पर मणिरामदास छावनी उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास शास्त्री महाराज माैजूद रहे। इसके अलावा विशिष्ट अतिथि में हनुमानगढ़ी के महंत राजूदास, सीतावल्लभ कुंज बड़े हनुमान के उत्तराधिकारी स्वामी छविराम दास, उदासीन आश्रम गाेलाघाट के महंत धर्मदास, स्वामी दिवाकराचार्य समेत अन्य संताें की उपस्थित रही। सर्वप्रथम भगवान श्रीरामजानकी व बजरंगबली के सम्मुख दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। उसके बाद समिति द्वारा मुख्य एवं विशिष्ट अतिथियों समेत अन्य का माल्यार्पण कर और अंगवस्त्र ओढ़ा स्वागत किया गया। फिर श्रीरामलला अयाेध्या जी सेवा समिति के अध्यक्ष अंतर्राष्ट्रीय ज्याेतिषाचार्य डॉ. आचार्य राजानंद शास्त्री उर्फ हरीश शास्त्री ने सभी संतों का बारी-बारी से सम्मान किया। हनुमानगढ़ी के महंत राजूदास ने बताया कि श्रीरामलला प्राण-प्रतिष्ठा के एक वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सवा लाख रामरक्षा स्तोत्र पाठ जप महाेत्सव आयाेजित किया जायेगा। इसके क्रम में संताें का सम्मान समारोह एवं श्रीरामलला रामरक्षा यंत्र विमाेचन कार्यक्रम आयोजित किया गया। डॉ. आचार्य राजानंद शास्त्री ने कहा कि रामरक्षा यंत्र का प्राचीन शास्त्रों में बहुत ही उल्लेख है। यह सनातन धर्मियों काे जाे प्रभु श्रीराम के भक्त-सेवक और हनुमान की उपासना करने वाले लोग हैं। उनके लिए यह सुरक्षा कवच के स्वरूप में हाेता है। इसके ऊपर अंकित जाे दिशाएं हैं। वह वास्तु दाेष से भी हम लाेगाें की सुरक्षा करती हैं। उन्हाेंने कहा कि जब श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर के गर्भगृह में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी। ताे वहां श्रीरामरक्षा यंत्र के ऊपर ही रामलला काे विराजमान किया गया। जब श्रीराम रक्षा यंत्र से इतने बड़े भव्य मंदिर का निर्माण हो सकता है। ताे हम सभी सनातनियों के जीवन का कल्याण भी प्रभु श्रीरामलला के इस यंत्र से हाे सकता है। इसी उद्देश्य काे समझते हुए सवा लाख रामरक्षा स्तोत्र पाठ से इस यंत्र को अभिमंत्रित करके प्रत्येक सनातनियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। जिसके लिए हमने हनुमानगढ़ी डॉट कॉम काे यह कार्य दिया है। समिति इस धार्मिक आयोजन काे संपन्न करवा रही है। यह हमारा उद्देश्य एवं लक्ष्य है। हमारा यह कार्यक्रम ़ रामलला के प्रथम पाटाेत्सव जनवरी 2025 के उपलक्ष्य में है। जाे हमारा उद्देश्य एवं लक्ष्य है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह रामरक्षा यंत्र या कवच मिलना तब शुरू होगा। जब सवा लाख रामरक्षा स्तोत्र के पाठ पूर्ण हाे जायेंगे। यंत्र में मंत्राें की शक्ति है। जब पूरे मंत्राें का जाप हाे चुका हाेगा। ताे यह मिलना शुरू हो जायेगा। लेकिन इसकी बुकिंग पहले हाेगी और रामरक्षा यंत्र रामलला के प्रथम पाटाेत्सव के बाद मिलना शुरू हाेगा।