अहंकार नहीं करना चाहिए, प्रभु की शक्ति अपार है: जगतगुरू राघवाचार्य

श्री राम कथा पार्क में भगवान कृष्ण के अद्भुत लीलाओं का वर्णन सन मंत्रमुग्ध हुए लोग

महेन्द्र कुमार उपाध्याय

अयोध्या। राम कथा पार्क में मूर्धन्य पंडित उमापति त्रिपाठी महाराज के आशीर्वाद से तीन कलश तिवारी मंदिर धर्मार्थ सेवा ट्रस्ट अयोध्या के सौजन्य से श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम दिवस की बेला में जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी डॉ राघवाचार्य जी महाराज ने भक्तों को श्रीकृष्ण की अद्भुत लीलाओं का वर्णन सुनाया। उन्होंने ब्रह्मा जी के मानमार्जन से लेकर कालयवधार, चीर हरण लीला और गोवर्धन पूजा तक की गाथा को विस्तार से समझाया।स्वामी ने कहा कि ब्रह्मा जी का मानमार्जन एक ऐसी लीला है जिसमें ब्रह्मा जी को अहंकार हुआ कि वे सृष्टि के रचयिता हैं, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बाल लीलाओं द्वारा उनके मान का हरण किया और उन्हें अपनी असली शक्ति का बोध कराया। इस लीला में यह संदेश छिपा है कि अहंकार किसी को नहीं करना चाहिए, क्योंकि परमात्मा की माया और उनकी शक्ति अपार है। स्वामी ने कालयवधार का वर्णन किया, जहां श्रीकृष्ण ने कालिय नाग का उद्धार किया। कालिय नाग का अत्याचार यमुना नदी में बढ़ चुका था और श्रीकृष्ण ने उसके फन पर नृत्य कर उसे पराजित किया। यह लीला दर्शाती है कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।चीर हरण लीला का वर्णन करते हुए स्वामी जी ने कहा कि यह घटना भगवान श्रीकृष्ण के भक्तवत्सल स्वभाव को प्रकट करती है। द्रौपदी की लाज बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने उसके चीर को अनंत किया और उसकी अस्मिता की रक्षा की। यह लीला भक्तों को यह सिखाती है कि जब भी वे संकट में होंगे, भगवान उनकी सहायता के लिए स्वयं उपस्थित होंगे।कथा शुभारंभ के पहले पंडित शिवेश्वरपति त्रिपाठी, पंडित श्रीशपति त्रिपाठी और महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी व्यास पीठ और व्यास पीठ पर विराजमान जगतगुरू स्वामी डॉ राघवाचार्य महाराज का पूजन अर्चन किया। कथा के विश्राम मेला पुनः आरती उतारी के और प्रसाद वितरण किया गया। आज की कथा में संघ के क्षेत्रीय प्रचारक अनिल जी सहित सैकड़ो की संख्या में कथा प्रेमी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का स्वागत रूद्रेश त्रिपाठी ने किया। आज की कथा में महंत रामानुज शरण ब्रह्मचारी, महंत महेश दास सहित सैकड़ो की संख्या में संत महंत भक्तजन उपस्थित रहे।