तुम क्या गए जहां से नज़ारे चले गए


हज़रत ए दावूद शाह मस्तान की बरसी के मौके पर फातिहा ख्वानी का आयोजन,,,,
अनुराग लक्ष्य, 5 अक्टूबर
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
,,, तुम क्या गए जहां से नज़ारे चले गए
थे ज़िंदगी के जितने सहारे चले गए।
इतना ही नहीं फूलों से रंगत चली गई
गुलशन में जितने फूल थे, सारे चेले चले गए।।
उपरोक्त कलाम शायर सलीम बस्तवी अज़ीज़ी ने हज़रत ए दाऊद शाह मस्तान की कब्र पर बतौर खेराज ए अकीदत पेश करके उनसे अपनी मुहब्बत का इज़हार किया, जिसे उपस्थित लोगों ने बेहद सराहा।
मौका था ताड़वाड़ी कब्रिस्तान में उनकी बरसी के मौके पर फातिहा ख्वानी का, जिसमें हज़रत ए अल्लामा मौलाना यासीन अख्तर मिस्बाही ने अपने खुसूसी बयानात में नात ओ मनकबत के साथ मरहूम दाऊद शाह मस्तान के हक में दुआएं करते हुए उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला से आला मुकाम हासिल करने वाली दुआएं करके उपस्थित लोगों की आंखें नम कर दीं।
शायर ए इस्लाम Saleem Bastavi Azizi ने अपने कई कलाम के साथ यह कलाम,
मदीने की हसीं गलियों से यह पैगाम आया है
मुहम्मद के गुलामों में भी तेरा नाम आया है , सुनाकर महफिल को खुशनुमा बना दिया।
इस मौके पर इस प्रोग्राम के रूह ए रवां इम्तेयाज शेख और यूसुफ शेख ने खुसूसी तौर पर अपने वालिद ए मोहतरम दाऊद शाह मस्तान की फातिहा ख्वानी में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनके अलावा फख्र ए आलम, नुरुल हसन, असलम आगवान, कलाम अज़ीज़ी, जुबैर अहमद और मुहम्मद मुहीउद्दीन ने भी अपनी अपनी खराज ए अकीदत पेश करके अपनी मुहब्बत का सुबूत पेश किया।
महफिल का एख्तमाम सालात ओ सलाम के साथ हुआ।