सारी दुनिया से तू जो हारा है, तुझको तेरी अना ने मारा है,शायर इमरान गोंडवी,,,,

अनुराग लक्ष्य, 30 सितंबर
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
आज की साहित्यिक और अदबी महफिलों में बहुत कम ऐसे शायर देखने को मिलते हैं, जो फन ए शायरी में पूरी तरह माहिर हों, लेकिन शुक्र है हम जब शायर इमरान गोंडवी के सुनते है, तब हमें एक कोहना मशक शायर का कलाम ही सुनाई पड़ता है। आइए आज आपको आज ऐसे कोहना मशक शायर इमरान गोंडवी की एक ग़ज़ल से रूबरू कराते हैं,,
1/ सारी दुनिया से तू जो हारा है,
तुझको तेरी अना ने मारा है।
2/ जिसने तुझको पिलाई थी मस्ती,
उसने नश्शा तेरा उतारा है ।
3/ उसके बंदों से तू करे नफरत,
यह खुदा को कहां गवारा है।
4/ रोज़ ए महशर वोह तूझसे ले लेगा,
जिसका हक तूने आज मारा है ।
5/ वक्त बदला तो वोह भी भूल गया,
कल जो कहता था तू हमारा है।
6/ जाने कितने यहां अकेले है,
क्या हुआ तू जो बेसहारा है ।
7/ जिसने इमरान सच का साथ दिया,
वोह बशर मुस्तफा को प्यारा है ।
उपरोक्त पंक्तियों में आप इमरान गोंडवी के शेरी फन और म्यार को बखूबी समझ सकते हैं, कि उन्हें गज़लों गीतों के इलावा नात गोयी में भी भरपूर महारत हासिल है।
मोहतरम इमरान गोंडवी उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से ताल्लुक रखते हैं और मुंबई में पिछले 20 सालों से मुशायरे और कविसम्मेलनों में अपनी भरपूर उपस्थिति दर्ज करा कर एक कामयाब शायर की हैसियत रखते हैं।
एक लंबे अरसे बाद मेरी मुलाकात हुई, तो बातों ही बातों में उन्होंने अदब और साहित्य में आई गुटबाजी और ओछेपन पर अपनी परितिकीर्या भी मुझसे साझा करते हुए कहते है, कि अब वोह लोग नहीं रहे जिनसे अदबी महफिलों की ज़ीनत और रौनक बढ़ जाया करती थी।