



अनुराग लक्ष्य, 17 अगस्त
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता।
,, काशी मथुरा ताज और दिल्ली
सब पे दिल मेरा कुर्बान, मैं एक सच्चा हिन्दुस्तानी सब कुछ मेरा हिंदुस्तान। सच कहने की आदत मेरी सच ही कहूंगा दुनिया में, विंध्य हिमालय यमुना गंगा सब हैं इस भारत की शान ।।
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी की उपरोक्त पंक्तियां यह चीख चीख कर कह रही हैं की भारती विशालता, महानता और वैभव का पूरी दुनिया में कोई सानी नहीं है।
स्वतंत्रता दिवस के 78 वें वर्ष की जश्न ए आज़ादी पर इस देश की आवाम से जब बात चीत का सिलसिला शुरू हुआ तो इस देश की आवाम ने अपने जज़्बात और भावनाओं को कुछ इस तरह बयां किया।
1/ डॉक्टर अमित श्रीवास्तव ,, यह देश हमेशा गंगा जमुनी तहजीब का देश रहा है और रहेगा। कितनी भी ताकतें केयों न आ जाएं, यह देश भाईचारा, अमन , और शांति का देश है। इसे कोई भी नफरत की ताकत नहीं मिटा सकती।
2/ वकार अहमद खान,,, हिंदुस्तान हमारे दिलों में हमारी धड़कनों के साथ चलता है और हमेशा इसी जज़्बात के साथ हम अपने मुल्क की अवाम के बीच ज़िंदा रहना चाहते हैं।
3/ यूसुफ शेख,,, अदब नवाज़ और समाजसेवी यूसुफ शेख ने अपने जज़्बात की बयानबाजी कुछ इस तरह की, हमें बचपन से यह पढ़ाया गया है की जिस मुल्क में रहो उस मुल्क के वफादार होते हुए अपनी जिंदगी खुशगवार बनाओ, तो हम तो उसी तहज़ीब और इल्म पर आज भी कायम हैं। और हिंदुस्तान को अपनी जान से भी अज़ीज़ समझते हैं।
4/ निर्माता निर्देशक संजय वत्सल,,, कौन कहता है कि हिंदुस्तान की आज़ादी में सिर्फ एक समुदाय का योगदान है। इस देश हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई के सभी धर्मों के लोगों ने इस देश को अपनी जान की बाज़ी लगा कर इसे आज़ाद कराया। इसलिए इस देश पर सभी का बराबर का हक है। इस सच्चाई को कोई झुटला नहीं सकता।
5/ इम्तियाज़ इतर वेवसायी,,, मैं तो सिर्फ इतना ही कहूंगा कि सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तान हमारा، हम बुलबुलें हैं इसकी यह गुलसेतां हमारा। हम भारत वासियों के लिए यह फख्र की बात है कि हम इस देश में जन्में। क्योंकि जो भारत की मिट्टी में है वोह कहीं भी नहीं।
6/ मौलाना साबिर ,,,, अल्लाह ने कुरआन के हवाले से फरमाया कि तुम्हारा ईमान तब तक मुकम्मल नहीं हो सकता जब कि तुम अपने मुल्क से वफादार नहीं होते। इसलिए तुम पर यह फ़र्ज़ आयद होता है कि जिस मुल्क के खेतों के उगे गंदुम की रोटी खाते हो। जहां के झरने का पानी पीते हो, तुम सबसे पहले उसके वफादार बनो।
यह संछिप्त साकछतकार सिर्फ देश हित में किसकी क्या सोच है। सिर्फ इस उद्देश्य के लिए किया गया न कि किसी अन्य मकसद या भेद भाव के लिए। अनुराग लक्ष्य संवाददाता सलीम बस्तवी अज़ीज़ी, अपने उपरोक्त तमाम शुभ चिन्तकतों का आभार परकट करता हूं, जिन्होंने अपने विचार हमसे साझा किए।